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Why do the Civil Surgeon and CMHO want to create the Bagde of Death?

Why do the Civil Surgeon and CMHO want to create the Bagde of Death?

सिविल सर्जन एवं CMHO क्यों लगाना चाहते हैं मौत की बागड़ (बागडे)

धार। जिला चिकित्सालय में सेवारत डॉक्टर नीरज बागडे द्वारा दिनांक 5 अगस्त 2023 को सत्य साईं अस्पताल में हुए हंगामा के बाद स्वास्थ्य आयुक्त महोदय संचालनालय स्वास्थ सेवाएं भोपाल को हस्तलिखित एक पत्र दिया गया। जिसमें उल्लेख किया गया कि डॉक्टर नीरज बागडे 2019 से धार जिला चिकित्सालय पदस्थ है और वह ड्यूटी टाइम के बाद निजी चिकित्सालय में जाकर प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। जिसमें सर्जरी भी शामिल हैं।

साथ ही डॉक्टर नीरज बागडे जो की शासकीय चिकित्सक है, उन्होंने मीडिया पर सामूहिक रूप से आरोप लगाया कि वह सरकारी मरीज को प्राइवेट चिकित्सालय में ले जाते हैं। जबकि यह बात सही है अभी भी वह इसी प्रकार की हरकतें कर रहे हैं। उन्होंने सभी मीडिया पर यह तंज करते हुए लिखा है कि वह मीडिया को किसी भी तरह से मनोरंजन नहीं करते हैं। अब यह तो वही जानते है की डॉक्टर नीरज बागडे कौन सा नृत्य जानते हैं जो उन्होंने मीडिया को नहीं दिखाया या मीडिया का मनोरंजन नहीं किया। उन्होंने आगे अपने लेटर में लिखा कि उनकी छवि धूमिल करने में मीडिया कोई कसर नहीं छोड़ रहा।

जबकि साफ जाहिर है की शासकीय चिकित्सक निजी चिकित्सालय में जाकर ऑपरेशन ड्यूटी टाइम के दौरान कर रहे थे, जिसकी खबर धार की समस्त जागरूक मीडिया ने अपने-अपने प्रतिष्ठानों में प्रकाशित की है। इन्हीं सब बातों को लेकर नीरज बागडे ने त्यागपत्र स्वीकार करने के लिए एक आवेदन दिया था।

Doctor Neeraj Bagde does not follow the government order, absent from the district hospital for a long time

आखिर त्यागपत्र स्वीकार करने के बाद पुनः जॉइनिंग क्यों दी गई ? —

धार जिला अस्पताल कार्यालय सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक द्वारा दिनांक 24 दिसंबर 2024 को एक पत्र जारी हुआ पत्र क्रमांक 2024 / 7253 जिसमें स्पष्ट वर्णित है कि 15 जून 2023 को नीरज बागडे ने उपस्थित होकर पुनः जॉइनिंग कर ली थी। अब इस प्रकार की हरकत करने वाले चिकित्सक को जिला चिकित्सालय में पुनः क्यों बुलाया जा रहा है या उसकी जॉइनिंग क्यों ली जा रही है यह तो सिविल सर्जन और CMHO ही जानते हैं वह आखिर इस प्रकार की मौत की बागड़ जिला चिकित्सालय में क्यों लगाना चाह रहे हैं यह तो वह स्वयं ही बता सकते हैं।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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