अतिथि शिक्षक की नियुक्ति में गड़बड़ी कार्रवाई की मांग

सिंगरौली। जिले के बरका संकुल के अन्तर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरका में हुए अतिथि शिक्षकों की भर्ती पर ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। इस मामले में ग्रामीण लोगों ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरका के प्राचार्य एल के पाण्डेय पर गंभीर आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जाँच के लिए कलेक्टर को जनसुनवाई में आवेदन दिया है। 

     गांव के लोगों का कहना है शासन द्वारा स्पष्ट निर्देश है कि कोई भी प्राचार्य या प्रधानाध्यापक अपनी संस्था में अपने ही सगे सबंधियो को अतिथि शिक्षक के पद पर नियुक्ति नहीं करेंगे लेकिन शासन के नियम और कानून शायद बरका के प्राचार्य पर लागू नहीं होते हैं। इसीलिए प्राचार्य एल के पाण्डेय ने सभी नियमो को दरकिनार करते हुए बिना किसी विज़ापन या सूचना के गोपनीय तरीके से अतिथि शिक्षक के पद पर अपनी बेटियों की नियुक्ति कर दी। 

गोपनीय तरीके से के नियुक्ति    

पाण्डेय ने अपनी दो बेटियों को गुपचुप तरीके से अतिथि शिक्षक के पद पर नियुक्त कर दिये जिसमे एक का नाम दीपिका पाण्डेय है, जिसकी नियुक्ति वर्ग 1 में जीवविजान के रूप में की गयी है। जबकि दुसरी बेटी का नाम शशि पाण्डेय है, जिसकी नियुक्ति वर्ग 1 हिंदी के पद पर की गयी है। 

छात्रो को शिक्षक का पता नहीं है ?

आश्चर्य की बात यह है, कि प्राचार्य ने अपनी दोनों बेटियों की नियुक्ति अगस्त में की है, और उनकी विद्यालय में उपस्थिति 01.09.2018 पोरटल में दर्शायी  गयी है। और हैरान कर देने वाली बात यह है की दोनों ही बेटियां आज तक विद्यालय में उपस्थित नहीं हुई है, छात्रो से चर्चा करने पर छात्रो ने बताया कि इन दोनों शिक्षिकाओ  को हमने विद्यालय में कभी नहीं देखा। 

छात्रो के भविष्य की चिंता नहीं है किसी को

प्राचार्य द्वारा चंद पैसों के लालच में अपनी ही बेटियों की नियुक्ति तो कर दी गयी लेकिन दोनों ही लोग आज तक पढ़ाने के लिए विद्यालय में उपस्थित नहीं हुए जिसका खामियाजा छात्रो को भुगतना पड़ रहा है क्योकि 11वीं की परीक्षा 12 फरवरी से शुरू हो जाएगी जब छात्रो को कुछ पढ़ाया ही नहीं गया है, तो छात्र परीक्षा में क्या लिखेंगे और कैसे पास होंगे। 

छात्र संगठन आन्दोलन की तैयारी में

उक्त मामले को लेकर छात्र संगठन छात्रो के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले प्राचार्य पाण्डेय को बर्खास्त करने के लिए शीघ्र ही आन्दोलन करने की तैयारी कर रहे है। 

इस मामले को जिला कलेक्टर एवं प्रदेश के जिम्मेदार अधिकारियों को गंभीरता पूर्वक जांच करने की आवाश्यकता है, नहीं तो आगामी लोकसभा चुनाव में भी इस मामले को चुनावी मुद्दा बनाकर तैयार होने की आंशका है।

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सम्पादक :- मध्यभारत live न्यूज़

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