प्रदेश के 1 लाख 84 हजार अध्यापकों को दीपावली का तोहफा

अधिकारीयों की लापरवाही के कारण शिक्षा का स्तर कमजोर हुआ, अनुपस्थित व लापरवाह शिक्षकों पर हो कठोर कार्यवाही

अनुपस्थित व लापरवाह शिक्षकों पर हो कठोर कार्यवाही- मुख्य सचिव। 

सहायक आयुक्त की लापरवाही के कारण शिक्षा का स्तर हुआ कमजोर।

धार। प्रदेश के मुख्य सचिव एस.आर.मोहंती ने गुरुवार को मंत्रालय में मध्यप्रदेश समग्र शिक्षा अभियान समिति की बैठक में निर्देश दिये कि सरकारी दायित्वों में लापरवाही बरतने और विद्यालय में अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों तथा शाला में अध्ययन नहीं करवाने वाले शिक्षकों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाय एवं शालाओं में चल रहे विशेष कॉपी चेकिंग अभियान का सख्ती से पालन कराया जावे। श्री मोहंती ने कहा कि प्रत्येक शाला में 5 से 10 प्रतिशत विद्यार्थियों की कॉपियां प्रधानाध्यापक द्वारा चेक करने की व्यवस्था को शत प्रतिशत लागू किया जाय।

विभागीय अधिकारी की लापरवाही के कारण शिक्षा व्यवस्था चरमराई

विगत दो तीन वर्षो से आदिवासी बाहुल्य धार जिले में विभागीय अधिकारी की लापरवाही व शालाओं की मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण धार जिले में शिक्षा का स्तर बहुत ही कमजोर हो गया है। सूत्रों से मिलीजानकारी अनुसार जिले के अधिकांश शिक्षक शालाओं में नहीं जाते है। आपस में तय कर लेते है कि दो दिन तुम नहीं आना दो दिन मै नहीं आउंगा। अवकाश का आवेदन रख कर चले जाते है, कोई निरीक्षण करने के लिए आगया तो अवकाश आवेदन बता दो अन्यथा दो तीन दिन के उपस्थिति हस्ताक्षर एक साथ कर देते है। ऐसे आदतन लापरवाह शिक्षकों की जानकारी विभाग के संकुल प्राचार्य, बीआरसी आदि को भी है किन्तु वह भी आँख बंद कर बैठें हुए है। ऐसे आदतन लापरवाह भगोड़े शिक्षकों की शिकायत विभागीय अधिकारियों को की गई हैं, फ़िर भी कोई कार्यवाही नहीं की जाती हैं।
ज़िले की अधिकांश संस्थाओ की चाबी भोजन परोसने वाली बाई के पास रहती हैं और वहीँ स्कूल को खोलतीं हैं और शिक्षक आराम से विद्यालय पहुँचते है। विद्यालय में बच्चे झाडू लगाते है, और पानी भरते हैं। संस्थाओं को निर्धारित समय पर नहीं खोला जाता है और निर्धारित समय के पूर्व ही बंद कर दिया जाता है। शिक्षक बच्चों को घेरकर स्कूल में बैठे रहते है किँतु अध्यापन नहीं कराते हैं।

हायर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य करते है मनमानी

ज़िले के अधिकांश हायर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य मुख्यालय पर निवास न करते हुए 70 से 100 किलोमीटर की दूरी तय करके विद्यालय में पहुँचते है और कुछ प्राचार्य तो बगैर सूचना दिये कई दिनों तक संस्थाओं से नदारद रहते है। इसकी जानकारी विभाग के अधिकारियों को भी रहती है फ़िर भी विभाग के अधिकारी मौन रहते है। ऐसे ढीले और सुस्त लापरवाह अधिकारियों के कारण शिक्षा का स्तर दिन ब दिन कमजोर होता जा रहा है।

मोनिटरिंग के अभाव में शिक्षा का स्तर हुआ कमजोर

जिले की शालाओं का नियमित निरीक्षण नहीं होने के कारण शिक्षा का स्तर कमजोर हो गया है। जिले के संकुल प्राचार्य तथा बीआरसी, बीएसी तथा विभाग के अधिकारियों के द्वारा शालाओं का निरीक्षण नियमित नहीं किया जाता हैं। जिससे शिक्षा का स्तर कमजोर हो गया है।

शिक्षा विभाग की योजनाए सिर्फ कागजों पर हो रही संचालित

राज्य शिक्षा केन्द्र और शिक्षा विभाग की योजनाओं को ज़िले में सिर्फ कागजों पर संचालित करके बताया जा रहा है। धरातल पर सारी योजनाओं को देखें तो कुछ भी नजर नहीं आता हैं और विभाग के सरकारी रिकॉर्ड में योजनाओ की जानकारी देखेंगे तो कागजों पर पूर्ण नजर आएंगी। शिक्षकों को नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जाना बताया जाता हैं, किंतु शिक्षक शालाओं में प्रशिक्षण अनुसार अध्यापन नहीं कराते हैं और मध्यान्ह भोजन मीनू अनुसार नहीं आता है। शाला के बच्चों को समय पर पुस्तकें, सायकल, छात्रवृत्ति, ड्रेस आदि नहीं मिल पाती हैं। शिक्षण सामग्री का पैसा शिक्षक ही डकार जाते है।

राकेश साहु—-

कार्यकारी संपादक :- मध्यभारतLive  

                   एवं

जिला ब्यूरो ”दैनिक स्वतंत्र एलान”

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सम्पादक :- मध्यभारत live न्यूज़

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