ऑटो में बैठाए जा रहे ज्यादा बच्चे, नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियाँ

ऑटो में बैठाए जा रहे ज्यादा बच्चे, HC ने सरकार को जारी किया अवमानना नोटिस

ऑटो में मोटर वाहन अधिनियम के तहत मात्र तीन से पांच सवारियां बिठाई जानी चाहिए। लेकिन जरुरत से ज्यादा बच्चे बिठाए जा रहे।

धार। हाईकोर्ट की युगल पीठ ने स्कूल के वाहनों में निर्धारित क्षमता से ज्यादा बच्चे बिठाए जाने के मामले में शासन को अवमानना नोटिस जारी किए हैं। साथ ही ओवरलोडिंग पर चिंता भी व्यक्त की है। कोर्ट ने पूछा है कि प्रतिबंध के बाद भी वाहनों में क्षमता से ज्यादा बच्चों को क्यों बिठाया जा रहा है। क्यों न दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

कोर्ट ने परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव डीजीपी आरटीओ को जवाब पेश करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।

अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने हाईकोर्ट में एक अवमानना याचिका दायर की है। याचिका में तर्क दिया है कि वर्ष 2012 में एक जनहित याचिका पेश की थी। जनहित याचिका के माध्यम से ध्यान आकर्षित कराया गया था, कि स्कूलों में संचालित ऑटो में छात्रों को निर्धारित संख्या से कहीं ज्यादा संख्या में बिठाया जाता है। इसके लिए ऑटो चालकों ने नियत सीट के समानांतर एक फट्टा लगा रखा है जिस पर छात्रों को बिठाया जाता है। इसके अलावा ड्राइवर सीट पर भी दोनों तरफ छात्रों को बिठाया जाता है।

ऑटो में पीछे की तरफ सामान रखने की जगह होती है, उसमें भी छात्रों को बाहर की तरफ पैर लटकाकर बिठाया जाता है। जबकि ऑटो में मोटर वाहन अधिनियम के तहत मात्र तीन से पांच सवारियां बिठाई जानी चाहिए लेकिन उनमें 10 से 12 बच्चों को बिठाया जाता है। इससे न केवल उनके स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है बल्कि दुर्घटना होने का अंदेशा हमेशा बना रहता है। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका में 10 दिसंबर 2012 को आदेश दिया था कि ऑटो में अतिरिक्त छात्रों को बिठाने के लिए जो फट्टा लगाया गया है उसे हटाया जाए।

इसके बाद भी ऑटो उल्लंघन करता पाया जाता है तो उस चालक का लाइसेंस निरस्त किया जाए। साथ ही ऑटो में 12 वर्ष से कम उम्र के पांच बच्चे ही बिठाए जाएं। जबकि 12 वर्ष से ज्यादा उम्र के चार बच्चे ही बैठ सकेंगे लेकिन पुलिस व परिवहन विभाग इसे रोकने में नाकाम रहा। जिससे ऑटो में संख्या से अधिक बच्चे बिठाए जा रहे हैं। इससे दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद अवमानना नोटिस जारी कर दिया है।

20-20 बच्चे तक बिठाए जा रहे हैं वाहनों में

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। छोटे वाहन में 20-20 बच्चे बिठाए जा रहे हैं। ड्राइवर सीट पर ही दो से तीन बच्चे बिठाये जाते हैं।

धार सहित सम्पूर्ण प्रदेश में भी हालात खराब हैं

ऑटो की क्षमता 5 बच्चों तक बिठाने की होती है। लेकिन उसमें 15 से 17 बच्चे तक बिठाये जाते है। कई बार बच्चे ऑटो में बाहर तक लटकते हुए देखने में आते है। जिसके कारण कभी भी दुर्घटना का शिकार हो सकते है।  

कई शहरो में इस प्रकार की लापरवाही से मासुम बच्चे दुर्घटना के शिकार हो चुके हैं। फिर भी जिला प्रशासन और RTO विभाग का ध्यान इस और नहीं है। 

धार शहर में तो ऑटो एवं मैजिक वाहन चालक बिना पंजीयन व बगैर बिमा पॉलिसी के ही अपने वाहनों को धड़ल्ले से दौडा रहे हे। इनमें से कई वाहन चालकों के पास तो उनका ड्रायविंग लायसेंस भी नहीं है। 

अधिवक्ता भदौरिया ने न्यायालय में तर्क दिया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी स्कूल के छात्रों को अधिकारी सुरक्षा प्रदान नहीं कर पा रहे हैं। रोजाना ओवरलोड ऑटो की वजह से दुर्घटनाएं हो रही हैं और मासूम घायल रहे हैं इसलिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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सम्पादक :- मध्यभारत live न्यूज़

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