गंभीर बीमारियों में आयुष्मान योजना मददगार साबित नहीं

गंभीर बीमारियों में आयुष्मान योजना मददगार साबित नहीं

इंदौर। जहां एक और केंद्र सरकार के द्वारा आयुष्मान योजना पर व उसके प्रचार-प्रसार पर अरबों रुपए फुक चुकी है। फिर भी इस योजना को आज तक जमीनी स्तर पर पूर्णता लागू नहीं माना जा सकता, गंभीर बीमारियों में इस योजना का लाभ किसी भी पात्र व्यक्तियों को पूर्णतः नहीं मिल पा रहा है। यह योजना मात्र कुछ हल्की-फुल्की बीमारी तक ही सीमित रह गयी है। क्योंकि इस योजना का लाभ अधिकांश लोगों को गंभीर बीमारियों में नहीं मिल पाया है। जहां एक और संपूर्ण भारतवर्ष में इस योजना को लागू कर सरकार ने अपनी वाहवाही लूटी थी किंतु अधीकांश गंभीर बीमारीयों से ग्रषित लोग भी इस योजना का पूर्ण लाभ लेने से वंचित रह गए। 

एक गंभीर बीमारी से जूझ रही 21 वर्षीय छात्रा के लिए सरकार की आयुष्मान योजना भी मददगार साबित नहीं हो रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से भोपाल से आई यह छात्रा इंदौर के एक निजी अस्पताल में भर्ती है लेकिन इलाज के लिए लाखों रुपए का खर्च आने से मुश्किल हो रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उसे अलग-अलग जगह से अब तक 2 लाख रुपए की सहायता उसके बैंक खाते में जमा की है और शासन की ओर से भी 2 लाख रुपए मिले हैं लेकिन बीमारी के उपचार के लिए यह राशि काफी नहीं है। उस छात्रा काे बोनमैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत है और डॉक्टर लगभग 20 लाख रुपए का खर्च बता रहे हैं।

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारियों का कहना है कि आयुष्मान योजना में ए-प्लास्टिक एनीमिया बीमारी शामिल नहीं है। इसलिए योजना के तहत उसका उपचार नहीं हो पा रहा है। खंडवा जिले की रहने वाली 21 वर्षीय छात्रा रानू अटूट अपनी मां संतोषबाई के साथ भोपाल में रहती है। उसके पिता ने सालों पहले मां को छोड़ दिया। तब से संतोषबाई भोपाल में घरों में काम करके अपनी इकलौती बेटी को पढ़ा रही थी। बीकॉम के बाद वह पत्रकारिता की डिग्री कर रही थी, लेकिन दो साल पहले उसे ए-प्लास्टिक एनीमिया की बीमारी ने घेर लिया। इस बीमारी में व्यक्ति के शरीर में खून बनने की स्वाभाविक प्रक्रिया बंद हो जाती है। खून न बनने से कमजोरी आती जाती है।खाना खाने पर उल्टी और बार-बार बुखार आना इसके लक्षणों में शामिल है। महीने में उसे तीन-चार बार ब्लड चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता उमाशंकर तिवारी ने बताया कि अलग-अलग जगह से छात्रा को अब तक हम करीब 2 लाख रुपए की मदद दिला चुके हैं लेकिन इलाज में बहुत ज्यादा खर्च बताया गया है। शासन की आयुष्मान योजना का लाभ उसे मिल जाए तो काफी राहत होगी। इस समय वह इंदौर के अरबिंदो अस्पताल में भर्ती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आयुष्मान योजना में बीमारियों के 1393 तरह के पैकेजेस कवर हैं पर ए-प्लास्टिक एनीमिया इसमें शामिल नहीं है इसलिए हम भी कुछ नहीं कर सकते।

किसको सुनाये कोण सुनेगा, देखा नहीं जाता बेटी का दर्द–

पति के बिना अपनी जिंदगी में खुश थी। घरों में कामकाज करके बेटी को पढ़ा रही थी। सोचा था बेटी को अपने पैरों पर खड़ा करूंगी, पर बेटी की इस बीमारी से टूट चुकी हूं। बेटी का दर्द देखा नहीं जाता। खाना खाती है तो उल्टी हो जाती है। बार-बार बुखार आता है। समझ में नहीं आता क्या करूं। किसके सामने जाकर माथा टेकूं। मुझे किसी के पैसे नहीं चाहिए, बस बेटी ठीक हो जाए। रानू की मां संतोषबाई बेटी का दर्द बताते-बताते रोने लगती हैं। वह कहती हैं- खंडवा के नागचून की रहने वाली हूं। जब बेटी तीन साल की थी तब पति छोड़कर चला गया। तबसे मैं मेहनत-मजदूरी के लिए भोपाल आ गई। बेटी के अलावा मेरा कोई वारिस नहीं है। दो साल पहले इसे बीमारी ने घेरा। पहले भोपाल के एम्स अस्पताल में भी दिखाया। वहां से दिल्ली एम्स भेजा गया। एम्स से कहा गया कि बोनमैरो ट्रांसप्लांट करना पड़ेगा। इतने खर्चीले इलाज के लिए पैसे कहां से लाऊं। कुछ समज नहीं आ रहा मेरी बेटी कैसे ठीक होगी अब तो भगवन ही मालिक है। 

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सम्पादक :- मध्यभारत live न्यूज़

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