देश की सेवा से जुड़े जवानों के कर्त्तव्य शासक-प्रशासकों से मंद नहीं होते

देश की सेवा से जुड़े जवानों के कर्त्तव्य शासक-प्रशासकों से मंद नहीं होते

 नई दिल्ली। माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कहा कि हर देशवासी शौर्य और प्रेरणादायक गाथा को याद कर रहा है। मैं उन सभी वीरसपूतों को नमन करता हूं, जिन्होंने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर कारगिल की चोटी से देश के झंड़े को उतारने वालों के इरादों को निस्तेनाबूत कर दिया था। साथियों 20 वर्ष पहले कारगिल की चोटियों पर जो विजयगाथा लिखी गई थी वो हमारी पीढि़यों दर पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

त्याग और तपस्या के लिए सिर झुकाने को भी मजबूर करती है ये शाम 

पीएम मोदी ने कहा कि ये शाम उत्साह भी भरती है, विजय का स्वाद का भी भरती है, साथ ही त्याग और तपस्या के लिए सिर झुकाने को भी मजबूर करती है। कारगिल में विजय भारत के संकल्पों और सामर्थय और संयम, मर्यादा और अनुशासन की जीत थी। युद्ध सरकारें नहीं पूरा देश लड़ता है। सरकारें तो आती-जाती रहती हैं लेकिन देश के लिए जो जीने और मरने की परवाह नहीं करते वो अजर-अमर होते हैं। सैनिक आज के साथ ही, आने वाली पीढी के लिए अपने जीवन का बलिदान करते हैं। सैनिक जिंदगी और मौत में भेद नहीं करते। देश की सेवा से जुड़े इन जवानों के कर्त्तव्य शासक-प्रशासकों से मंद नहीं होते। 2014 में शपथ लेने के बाद मुझे कारगिल जाने का मौका मिला। मैं कारगिल 20 साल पहले भी गया था जब युद्ध् अपने चरम पर था।

वन रेंक, वन पेंशन को लागू किया, हमनें उस विश्वास को पूरा किया

पीएम मोदी ने कहा कि एक साधारण नागरिक के नाते मैंने शौर्य स्थल को नमन किया जो मुझे तीर्थस्थल का अनुभव कराता है। युवा रक्त देने के लिए कतारों में खड़े थे, बच्चों ने अपने गुल्लक तोड़ दीये। उस समय अटल बिहारी वाजपेयीजी ने भरोसा दिलाया कि जिन लोगों ने हमारी सुरक्षा की उनकी देखभाल हम करेंगे। हमनें उस विश्वास को पूरा किया। हमने वन रेंक, वन पेंशन को लागू किया। इस बार भी सरकार बनते ही शहीदों के बच्चों की स्कोलरशिप बढ़ाई। पाकिस्तान शुरू से ही कश्मीर को लेकर छल करता रहा है। 1999 में उसके छल पहले की तरह छलनी कर दिया। उस समय अटलजी ने कहा था कि हमारे पड़ोसी देश को लगता था कि कारगिल को लेकर हमारा पड़ोसी संघर्ष करेगा और पंचायत करेगा और इसको लेकर एक बंटवारे की रेखा खींच जाएगी, लेकिन हम जवाब देंगे इसकी उन्हें उम्मीद नहीं थी। रोने गि़ड़गिड़ाने की बजाय जवाब देना उन पर भारी पड़ गया। इससे पहले अटलजी की शांति की पहल ने दूसरे देशों का नजरिया बदला। भारत का इतिहास रहा है कि भारत कभी भी पहले से आक्रांता नहीं रहा। हमारा देश इसी नीति पर चला है।

सैनिक की समर्पण भावना ने हर भारतीय का दिल छुआ है

पीएम मोदी ने कहा कि जब मैं इजराइल जाता हूं तो वहां मुझे वो तस्वीर दिखाई जाती है जब भारतीय सैनिकों ने हाइफा को मुक्त कराया था। प्राकृतिक आपदाओं में सैनिक की समर्पण की भावना ने हर भारतीय का दिल छुआ है। हमारी पराक्रमी सेना परम्परागत युद्ध् में पारंगत है। अब युद्ध का स्वरूप बदल गया है। अब मानव छद्म युद्ध् का शिकार हो गया है। आतंकवाद के माध्यम से कुछ लोग अपनी राजनीति को बढ़ा रहे हैं। आज की लड़ाइयां अंतरिक्ष तक पहुंच गई है। साइबर वर्ल्ड में पहुंच गइ है। इसलिए सेना को आधुनिक बनाना जरूरी है। राष्ट्र की सुरक्षा के लिए किसी दबाव, प्रभाव और किसी अभाव में काम नहीं होगा। चाहे अरिहंत के जरिए परमाणु त्रिकोण का निर्माण हो या ए-सेट के जरिए हम हर तरह के जरिए हर कदम उठाते रहेंगे।

सेना को आधुनिक साजो-समान मिलने वाले है

पीएम मोदी ने कहा कि सेना के आधुनिकीकरण का काम तेजी से चल रहा है। डिफेंस क्षेत्र में निवेश बढ़ाया जा रहा है। आने वाले समय में हमारी सेना को आधुनिक साजो-समान मिलने वाले हैं। इसके अलावा सेना के लिए जरूरी है ज्वाइंटनेस। चाहे वर्दी कोई भी पहने लेकिन उसका मकसद एक ही होता है देश की रक्षा। हमारी सेना के तीनों अंकों को आधुनिक होने के साथ व्यवहार और व्यवस्था में जुड़ना समय की मांग है। हम सीमा से जुड़े गांवों को राष्ट्र के विकास में भागीदार बना रहे हैं। हमें भलीभांती अहसास है कि सीमा पर बसे लोगों को परेशान होना पड़ता है। स्थिति को बदलने के लिए बोर्डर डवलपमेंट प्रोग्राम को और सशक्त किया जा रहा है।

देश के लोगों के प्रयास से देश की सुरक्षा अभेध्य है

पीएम मोदी ने कहा कि देश के लोगों के प्रयास से देश की सुरक्षा अभेध्य है और रहेगी। 1947 में क्या सिर्फ एक भाषा विशेष बोलने वाले लोग या एक पंथ या एक जाति के लोग आजाद हुए थे। नहीं पूरा भारत आजाद हुआ था। क्या हमने अपना संविधान एक जाति, पंथ के लिए लिखा था, जी नहीं पूरे देश के लिए लिखा था। कारगिल में शहीदों ने किसके लिए कुर्बानी दी थी। अपने लिए, किसी एक भाषा, जाति और धर्म के लिए नहीं। बल्कि मां भारती के लिए। हम संकल्प लें कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं होने देंगे। उनके सपनों का भारत बनाने के लिए काम करें। भारत माता की जयकारे लगाते हुए पीएम मोदी ने अपना सम्बोधन खत्म किया।

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सम्पादक :- मध्यभारत live न्यूज़

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