नदियों को प्रदूषित करने वाली औद्योगिक इकाईयों (फेक्ट्री) को बंद करने की कार्रवाई

भोपाल। पर्यावरण एवं लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उन औद्योगिक इकाईयों को बंद करने की कार्रवाई की जाये, जिन उद्योगों से निकलने वाले दूषित पानी से प्रदेश की नदियाँ प्रदूषित हो रही हैं। श्री वर्मा ने भोपाल में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की बैठक में यह बात कही। उन्होंने विशेष रूप से देवास और नागदा औद्योगिक क्षेत्र की उन औद्योगिक इकाईयों का उल्लेख किया, जिनके दूषित पानी से क्षिप्रा और चम्बल नदी प्रदूषित हो रही है।

   प्रमुख सचिव पर्यावरण विभाग अनुपम राजन ने बताया कि देवास और नागदा औद्योगिक क्षेत्र की इकाईयों का निरीक्षण किया गया । इनमें मेसर्स सन फार्मा लिमिटेड, मेसर्स शारदा मिनरल्स एंड केमिकल प्रायवेट लिमिटेड, मेसर्स स्वास्तिक इंटरनेशनल प्रायवेट लिमिटेड, मेसर्स केशव इंडस्ट्रीज लिमिटेड, मेसर्स् जाजू सर्जिकल लिमिटेड, मेसर्स राज पायोनियर प्रायवेट लिमिटेड, मेसर्स नवीन फ्लोरीन इंटरनेशनल लिमिटेड, मेसर्स एच.आर. जानसन लिमिटेड में प्रदूषण की स्थिति पाई गई। इन सभी इकाईयों को मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा क्लोजर नोटिस जारी किये जा चुके हैं। आगामी 15 दिनों में समाधानकारी जवाब नहीं मिलने पर इनके विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही की जायेगी।

    पर्यावरण मंत्री श्री वर्मा ने चम्बल नदी में नागदा के समीप हो रहे नदियों के प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए अधिकारियों को हर महीने औद्योगिक इकाईयों के नियमित निरीक्षण किये जाने के निर्देश दिये। श्री वर्मा ने पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के चीराखाना नाले में हो रहे प्रदूषण की जाँच करने के भी निर्देश दिये। बैठक में प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के मेम्बर सेक्रेट्ररी ए.ए. मिश्रा भी मौजूद रहे।

 

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सम्पादक :- मध्यभारत live न्यूज़

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