पत्रकार के साथ पुलिस द्वारा की गयी छीना झपटी

थाना प्रभारी की  दबंगई के विरोध में पत्रकारो द्वारा एसडीएम/एसडीओपी को ज्ञापन।

रीवा – त्योंथर। पत्रकार को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। लेकिन उन्हें सिर्फ नाम के लिए ही चौथा स्तंभ कहा जाता है। क्योंकि सुरक्षा के नाम पर सिर्फ दिखावा ही है, अक्सर सुनने में आता है कि आज इस पत्रकार के साथ मारपीट की गयी है, तो कई थानों में थानेदारों और एसडीएम द्वारा डराया धमकाया जाता की यदि तुमने मेरे खिलाफ कुछ भी लिखा या शिकायत की तो मै तुम्हे ऐसे केस में फसा दूँगा की जिंदगी भर सड़ते रहोगे।

इसी के डर से  ज्यादातर पत्रकार काम करना छोड़ देते है या उनकी चापलूसी करते है। तो ये कैसा चौथा स्तंभ है, जिसको सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नही, यदि कोई पत्रकार किसी भ्रस्ट अधिकारी के खिलाफ नही लिखता तो उन्हें कहा जाता है कि वह बिका हुआ है और लिखता हे तो धमकी दी जाती है। अब पत्रकार करे तो क्या करे। वहीँ पत्रकार किसी के खिलाफ लिखे तो वो अधिकारी अपने पद का धौस दिखाकर उन्हें  धमकाते है।       

 इसी तरह का प्रकरण 24 मार्च को चिल्ला मे आया जँहा पर एक स्थानीय पत्रकार रज्जन तिवारी के साथ हुआ है। जब सोहागी पुलिस छापामार  कार्यवाही कर रही थी उसी दौरान रज्जन तिवारी द्वारा कुछ फोटो और वीडियो बनाए जा रहे थे तभी सोहागी थाना प्रभारी और उनके आरक्षक द्वारा धमकाते हुए पत्रकार का मोबाइल छीन लिया गया।

उक्त घटना के सम्बन्ध में दिनांक 28 मार्च को एसडीएम/ एसडीओपी त्योंथर को ज्ञापन के माध्यम से अवगत करवाया है और इस मामले की जांच कर सम्बंधित अधिकारी, कर्मचारीयों के विरूद्ध दंडात्मक कार्यवाही की जाय, ताकि भविष्य में किसी पत्रकार के साथ ऐसा बर्ताव न किया जासके।

आवेदन में रज्जन तिवारी ने अपनी पीड़ा बया करते हुए लिखा कि 24 मार्च को नगर पंचायत त्योंथर के वार्ड नंबर 14  (चिल्ला) में पिंटू माझी पिता छोटेलाल मांझी के यहाँ सोहागी थाना प्रभारी द्वारा दबिश देकर  तलाशी की कार्यवाही की जा रही थी। 

उस दौरान मकान मालिक और पुलिस के बीच गाली गलौज एवं छीना झपटी जैसा माहौल  निर्मित हो गया था जिसका वीडियो और फोटो रज्जन तिवारी द्वारा बनाया जा रहा था, उसी दौरान थाना प्रभारी सोहागी और कुछ आरक्षकों ने रिकार्डिंग किया हुआ मोबाइल छीन लिया और गलत शब्दो का का प्रयोग करते हुए शासकीय कार्य में बाधा डालने का मुकदमा कायम करने की धमकी दी। पुलिस द्वारा किया गया यह कृत्य मीडिया की स्वतंत्रता का गंभीर हनन व अपमान है।

आंचलिक पत्रकारो के साथ पुलिस सहित अन्य शासकीय विभागों के कंर्मचारियो द्वारा आए दिन इस तरह की घटनाएं घटित होती रहती है जो मीडिया कर्मियों के सुरक्षा के लिए गंभीर  चिंताजनक विषय है, यदि पुलिस द्वारा लोक तंत्र के चौथे स्तम्भ को इसी तरह प्रताड़ित किया जाता रहा तो समाज और देश के निर्माण पर मीडिया निष्पक्षता से अपना योगदान कैसे दे पायेगी।

           आवेदन में सभी आंचलिक पत्रकारो द्वारा मांग की गई कि पत्रकार के साथ पुलिस द्वारा छीना झपटी एवं अभद्रता की जाँच कर संलिप्त पुलिस कर्मियों के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही की जाये।

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सम्पादक :- मध्यभारत live न्यूज़

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