फिर पड़ी किसानों पर मौसम की मार, कृषक हुए बे हाल

धार। उत्तर-पूर्वी हवा के कारण ठंडक बढ़ गई है। तीन साल बाद शुक्रवार को सबसे ठंडी रात रही। पारा तीन डिग्री नीचे खिसककर 7.02 डिग्री पर आ गया। हवा की गति भी 24 से 25 किलोमीटर प्रति घंटा रही। इसी गति से सर्द हवा चलती रही तो पारा और गिरने की संभावना है। शुक्रवार को दिन का तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रहा। शहरवासियों ने दिनभर ठंडक महसूस की। मौसम विभाग के मुताबिक 24 दिसंबर 2015 को सबसे न्यूनतम तापमान 7 डिग्री पहुंचा था। 2016 में 9.1 डिग्री और 2017 में पारा 8.8 डिग्री से नीचे नहीं गया था। इस बार ठंड लगातार बढ़ रही है। इसके पहले 18 दिसंबर को तापमान 7.08 डिग्री था। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि गुरुवार और शुक्रवार को चली ठंडी हवा के कारण तापमान में गिरावट आई है। हवा का असर शनिवार के मौसम पर भी पड़ेगा।

ठंड गिरने का मुख्य कारण उत्तर भारत में हो रही बर्फबारी
जम्मू-काश्मीर सहित उत्तर भारत के कई शहरों में कुछ दिनों से लगातार बर्फबारी हो रही है। इसके साथ ही हवा की गति भी तेज है। इन इलाकों से आ रही ठंडी हवा मालवा में प्रवेश कर रही है। यह हवा शुष्क है, इस कारण ठंडक का अहसास अधिक होता है। शुक्रवार को धूप भी लोगों को ठंड से राहत नहीं दे पाई। इस कारण अधिकांश लोग घर में ही रहे।

फसलों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा ठंडक का

सरदारपुर विधानसभा क्षेत्र में ठंड गिरने से किसानों के खेत में खड़ी फसलें नष्ट हो गई है, जैसे आलू, टमाटर, पपीता, जाम, गुलाब और भी अन्य फसलें नष्ट हो रही है, ग्राम धूलेट के कृषक बाबूलाल परवार व नृसिंह सिंदड़ा ने उद्द्यानिकीय विभाग विकासखंड सरदारपुर अधिकारी को फसलो से संबंधित मामले मैं अवगत करवाया गया, जिसके चलते आज उद्द्यानिकीय विस्तार अधिकारी अजीत द्विवेदी ग्राम धुलेट कृषको के खेत पर पहुंचे और फसलों का मुआयना किया। 

इस बारे में हमारे तहसील संवाददाता ने अधिकारियों से फसलों की जानकारी के बारे में बात की तो अधिकारी अजीत द्विवेदी द्वारा बताया गया कि बीती रात फसलों पर दावा (पाला) गिरने की वजह से टमाटर, पपीता और अन्य फसलें नष्ट हुई है, जिससे ग्राम धुलेट के कृषक बाबूलाल परवार के खेत पर 3 बीघा टमाटर की फसल नष्ट हो गई है। वहीं एक और कृषक नरसिंह सिंदड़ा के खेत पर ढाई बीघा जमीन में पपीते की खड़ी फसल थी जो कल रात दावा पढ़ने से नष्ट हो गई, यही हाल पूरी तहसील के अनेकों ग्राम के कृषक बंधुओं की फसल का हुआ है, जो पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है।

फिर पड़ी फसलों पर मौसम की मार

यही हाल पूरे जिले के कई गांव में किसानों के साथ हो रहा है, यह हाल नागदा में भी देखने को आया जहां पर किसानों की आलू एवं चने की फसलें पूरी तरह से ठंडक बढ़ने से नष्ट हो चुकी है। फसलों के ऊपर बर्फ की परत जम गई थी जिसके कारण हरी-भरी फसल पूर्ण रूप से नष्ट हो चुकी है। अब किसानों को नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री से उम्मीद है, कि वह किसानों के कर्जे के साथ साथ किसानों को फसल बीमा दिलाने के लिए कितने पुरजोर प्रयास करते हैं। किसानों के अन्नदाता मुख्यमंत्री अब उनके हक में क्या फैसला सुनाते हैं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा 

 

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सम्पादक :- मध्यभारत live न्यूज़

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