महाकाल मंदिर के विकास के नाम पर राजनीति नहीं होने देंगे !

महाकाल मंदिर के विकास के नाम पर राजनीतिक एजेंडा लागू कर रही कांग्रेस सरकार। भाजपा के जनप्रतिनिधियों ने राज्यपाल से की सरकार की कारगुजारियों पर रोक की मांग। कमलनाथ सरकार ने अब तक परियोजना पर खर्च नहीं की फूटी कौड़ी।

उज्जैन ब्यूरो- चंद्रप्रकाश (बंटी) बैरागी

उज्जैन। प्रदेश सरकार उज्जैन में महाकाल मंदिर परिसर के विकास के नाम पर अपना राजनीतिक एजेंडा लागू कर रही है। इसके लिए न क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की राय ली जा रही है, न उनकी बात सुनी जा रही है। सरकार द्वारा बनाई गई मंत्रियों की समिति ऐसे निर्णय ले रही हैं, जिनसे स्मार्ट सिटी के प्रावधानों को उल्लंघन होता है। यह शिकायत उज्जैन से भाजपा सांसद अनिल फिरोजिया, पूर्व मंत्री पारस जैन, महापौर श्रीमती मीना जोनवाल, विधायक मोहन यादव एवं नगरपालिक निगम अध्यक्ष सोनू गहलोत ने प्रदेश के राज्यपाल महोदय से ज्ञापन के माध्यम से की। जनप्रतिनिधियों ने महाकाल मंदिर क्षेत्र में प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही मनमानी गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी की। बाद में जनप्रतिनिधियों ने प्रदेश कार्यालय पहुंचकर प्रदेश अध्यक्ष व सांसद राकेश सिंह को भी प्रदेश सरकार की मनमानी से अवगत कराया।

भाजपा सरकार के कामों को अपना बता रही नाथ सरकार

भारतीय जनता पार्टी के जनप्रतिनिधियों ने राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में कहा है कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार और उसके द्वारा बनाई गई मंत्रियों की समिति ऐसा प्रचारित कर रही है, जैसे मंदिर क्षेत्र में वह भारी विकास करने जा रही है। जबकि फिलहाल इस क्षेत्र में जो भी विकास कार्य हो रहे हैं, वे पूर्ववर्ती भाजपा सरकार द्वारा ही शुरू कराए गए थे, या स्वीकृत किए गए थे। ज्ञापन में कहा गया है कि नंदीहाल का विस्तार, महाकाल टनल, निकास द्वार, कोटितीर्थ कुण्ड तीर्थ एवं कार्तिकेय मंडप आदि के कार्य भाजपा सरकार द्वारा ही शुरू कराए गए थे। इस क्षेत्र में या मंदिर परिसर के बाहर भी जो काम चल रहे हैं, उनमें वर्तमान प्रदेश सरकार की कोई भूमिका नहीं है। ज्ञापन में कहा गया है कि स्मार्ट सिटी परियोजना के कामों के लिए 50 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार दे रही है, जबकि 50 प्रतिशत राशि नगरनिगम एवं प्रदेश शासन को देना था। लेकिन प्रदेश सरकार ने इस मद में अभी तक फूटी कौड़ी भी नहीं दी है।

स्मार्ट सिटी के प्रावधानों का उल्लंघन कर रही सरकार और समिति

ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य सरकार द्वारा बनाई गई तीन मंत्रियों की समिति स्मार्ट सिटी के प्रावधानों का उल्लंघन कर रही है और परियोजना के अंतर्गत स्वीकृत की गई कार्ययोजना से छेड़छाड़ कर रही है, जबकि उसे ये अधिकार ही नहीं है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि महाकाल मंदिर परिसर में या उसके बाहर किसी भवन या संपत्ति के अधिग्रहण का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन मंत्रियों की समिति इसका उल्लंघन कर रही है। ज्ञापन में कहा गया है कि स्मार्ट सिटी परियोजना को नगरनिगम, स्मार्ट सिटी कंपनी, राज्य शासन तथा केंद्र शासन ने स्वीकृत किया है। फिर मंत्रियों की समिति किस अधिकार से इसके प्रावधानों में परिवर्तन कर रही है।

दुर्भावनापूर्वक काम कर रही प्रदेश सरकार

ज्ञापन में कहा गया है कि भगवान महाकाल सभी के हैं, लेकिन प्रदेश सरकार इसमें भी दुर्भावनापूर्वक काम कर रही है। स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए कलेक्टर की अध्यक्ष में स्मार्ट सिटी कंपनी बनाई गई थी और उसे सलाह देने के लिए एक समिति बनाई गई थी, जिसमें सांसद, नगर से संबंधित विधायक एवं महापौर को शामिल किया गया था। लेकिन कमलनाथ सरकार और मंत्रियों की समिति इस सलाहकार समिति की दुर्भावनापूर्वक उपेक्षा कर रही है। मंत्रियों की समिति की बैठक में इन जनप्रतिनिधियों को नहीं बुलाया गया और बड़नगर, तराना, खाचरौद, घट्टिया के विधायकों सहित ऐसे लोगों को आमंत्रित किया गया था, जिनका इस व्यवस्था या महाकाल परिसर के विकास से कोई संबंध नहीं है। ज्ञापन में प्रदेश सरकार द्वारा विकास के नाम पर किए जा रहे अवैधानिक कृत्यों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।

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सम्पादक :- मध्यभारत live न्यूज़

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