राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को पलीता लगाने में जुटे भ्रष्ट अधिकारी

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को पलीता लगाने में जुटे भ्रष्ट अधिकारी

10 दिन से सेंटर पर नहीं हे कपड़ा, कम भाव में टेलरों से सिलवा रहे है बच्चों के कपड़े

धार। देलमी स्थित स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं का रोजगार पुरुषों को देने के कारन नाराज महिलाओं ने जब अधिकारियों से शिकायत की तो अधिकारि चुप रहने के लिए दबाव बना रहे। 

     राज्य शासन ने इस बार के गणवेश बनाने का कार्य आजीविका मिशन के माध्यम से रोजगार उपल्ब्ध कराने के लिए स्वयं सहायता समहों की महिलाओं को दिया है। जिले में प्राथमिक स्कूलों के 1.50 लाख से अधिक बच्चों के गणवेश बनाए जाने हैं। जिन्हें 1200 से ज्यादा समूहों में हजारों महिलाएं को सिलाई के लिए दिया गया है। इस काम से उन्हें 200 से 300 रुपए प्रतिदिन तक मिल जाता हैं। लेकिन अब इस कार्य में धांधली होने के आरोप हैं। देलमी स्थित संस्कार आजिविका समूहों की महिलाओं ने बताया की 10 दिन से हमारे सेंटर पर कपड़ा सप्लाय नहीं किया गया है। इसलिए यहां महिलाओं के पास काम नहीं बचा। कपड़ा नहीं आने पर कई बार सेंटर प्रभारी प्रवीण सोलंकी से बात की लेकिन वो हमें ये कहकर टाल रहे हैं कि कपड़ा खत्म हो चुका है। जबकि सारे गणवेश टेलरों को देकर उनसे सिलवाएं जा रहे हैं। कलमखेड़ी सेेंटर पर हमने खुद देखा कि टेलर का पूरा परिवार कपड़े सिल रहा है। महिलाएं यहां आकर खाली बैठी रहती हैं। सेंटर प्रभारी मनीषा पंवार व समूह की महिला आरती ठाकुर, दिव्या ठाकुर पूजा पाल सहित अन्य महिलाओं ने बताया की अधिकारी हमसे हमारा काम छिनकर टेलरों से कम रेट पर कपड़ा सिलवा रहे हैं। एक गणवेश बनाने का हमें 22 रुपए मिलता हैं जबकि इसे टेलरों से 15 रुपए में सिलवाया जा रहा है। हमने कई दुकानों पर टेलरों को ये गणवेश सिलते हुए देखा हैं। टेलरों ने हमें खुद कहा कि हमें 15 रुपए प्रति गणवेश में ये काम दिया गया है। जब हमें ये बात पता चली तो हमने सिलाई प्रभारी प्रवीण सौलंकी को जानकारी दी। लेकिन सौलंकी हमें चुप रहने का कहकर मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन हमें अपना अधिकारी चाहिए। ये महिलाएं खेतों में मजदूरी करती थी। किसी तरह इन्हें रोजगार मिला। हमने ऋण लेकर सिलाई मशीनें खरीदी।

    इस संबंध में सिलाई कार्य प्रभारी प्रवीण सोलंकी से बात हुई तो वो अपना पल्ला झाड़ते नजर आए वे बोले महिलाओं से ये किसने कहा कि कपड़ा खत्म हो चुका हैं। टेलरों को कैसे कपड़ा पहुँच रहा हैं। मुझे इस सम्बन्ध में जानकारी नहीं हैं। मैं अभी पता लगवाता हूंं क्या मामला हैं।

    वहीं इस संबंध में जब जिला कार्यक्रम अधिकारी हिमांशु शुक्ला से बात हुई तब उन्होंने बताया कि यह मामला अभी मेरे संज्ञान में नहीं है ट्रेलरों के पास समूह का कपड़ा कैसे पहुंच रहा है मैं इस मामले की जांच करवाता हूं और साथ ही देलमी सेंटर पर तुरंत कपड़ा भिजवाता हूं। हमें शासन से जो 70% राशि आई थी वह खर्च हो चुकी है, साथ ही 50 हजार गणवेश का वितरण हम कर चुके हैं 90% काम पूरा हो चुका है बाकी का कार्य पूरा होने पर महिलाओं को उनका मानदेय लाभांश दिया जाएगा। 

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सम्पादक :- मध्यभारत live न्यूज़

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