वनाधिकार को लेकर प्रशिक्षण शिविर

धार। संचालनालय आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाएं मध्यप्रदेश भोपाल के पत्र क्रमांक 352 द्वारा समस्त कलेक्टरों को माननीय सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली में प्रचलित याचिका क्रमांक 50/2008 एवं 109/2008 वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया विरुद्ध भारत सरकार एवं अन्य में 13-02-19 एवं 28-02-19 को दिए गए आदेशों के अनुसार वन अधिकार अधिनियम के तहत निरस्त हुआ अमान्य किए गए दावेदारों को आगामी आदेश तक बेदखल ना करने हेतु लिखा गया है। आदेशों का पुनरीक्षण करने की प्रक्रिया के संबंध में शीघ्र ही पृथक से निर्देश दिए जाने के लिए लिखा गया है। इस संबंध में निम्न निर्देश जारी किए जाते हैं,

नंबर 1- समस्त निरस्त दाओं को जिला स्तरीय समिति द्वारा बैठक आयोजित कर उसमें प्रस्ताव पारित कर ग्रामसभा को भेजे जाएं।

नंबर 2- ग्राम सभा द्वारा अपनी विशेष बैठक में प्रकरण में पुनः परीक्षण कर उन्हें ग्राम स्तरीय वनाधिकार समिति को सौंपी जाने के संबंध में निर्णय लिया जावे।

नंबर 3- निरस्त दावे की पुनः सुनवाई एवं निराकरण हेतु प्रत्येक स्तर के अधिकारियों की सहायता हेतु आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा वेब पोर्टल एमपी वनमित्र विकसित किया गया है, जो शीघ्र ही सभी जिलों हेतु लाइव कर दिया जाएगा।

नंबर 4- वन मित्र सॉफ्टवेयर के माध्यम से दावेदार अपने दावे को साक्ष दस्तावेजों सहित ऑनलाइन जमा कर सकता है। जमा किए गए दावे का ऑनलाइन ही निराकरण होगा साथ ही किए गए दावों की स्थिति का अवलोकन भी लाइव देखा जा सकेगा। दावा मान्य होने की स्थिति में ऑनलाइन वन अधिकार पत्र जारी किया जाएगा। अमान्य होने की स्थिति में किन कारणों से अमान्य किया गया है। कारण व जानकारी दावेदार को आनलाइन प्राप्त हो सकेगी।

नंबर 5- प्रत्येक निरस्त दावेदार अपने निकटतम इंटरनेट कियोस्क के माध्यम से वन मित्र सॉफ्टवेयर में अपना दावा या उसे सपोर्ट करने वाले साक्ष अपलोड कर सकता है।

नंबर 6- वन अधिकार समिति स्तर पर प्रत्येक निरस्त दावे के निराकरण हेतु आवेदकों को उनकी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा एवं उन्हें अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत करने का भी अवसर दिया जावेगा। पूर्व आवेदन में यदि कोई संशोधन या अतिरिक्त तथ्य देना चाहते हैं, तो वे ऐसा भी कर सकते हैं।

नंबर 7- ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक को मध्यप्रदेश शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग स्तर से वन अधिकार समिति की सहायता हेतु विशेष सहायक नामांकित किया गया है। यह इन बचे हुए आवेदकों को अपने हक प्राप्त करने में पूरी मदद करेंगे जिला स्तर पर इस प्रक्रिया से जुड़े समस्त अधिकारी कर्मचारियों को विस्तृत रूप से प्रशिक्षण दिया जाएगा।

नंबर 8- वन अधिकार नियम 2008 के नियम 14 एवं 15 में यह व्यवस्था है, कि कोई आवेदक यदि ग्राम सभा के किसी आदेश या संकल्प से वंचित रह गया हो तो उपखंड स्तरीय समिति के समक्ष याचिका प्रस्तुत कर सकता है। इसी प्रकार उपखंड समिति के निर्णय से असंतुष्ट पक्षकार जिला स्तरीय समिति के समक्ष याचिका प्रस्तुत कर सकता है।

नोट पूर्व में इस प्रक्रिया में प्रदेश स्तर पर इस प्रकार के अर्ध न्यायिक प्रकरण का उपयोग किसी के द्वारा नहीं किया गया है। यह इस बात को अवगत करवाता है, कि दावेदार को इस विधिक अधिकार का ज्ञान नहीं है, या उनके पास इस प्रकार का कोई सूचना का उपक्रम नहीं है, आतः इसका प्रचार-प्रसार एवं प्रत्येक निरस्त आवेदन की दावेदारी की जानकारी होना अतिआवश्यक है।

सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण विभाग धार ब्रजेश चंद्र पांडे के निर्देशन में मास्टर ट्रेनर अनिल व्यास विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं वीर सिंह राजपूत विकास खंड शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन में शाखा प्रभारी राजेंद्र जोखड़े और ई गवर्नेंस से सारिका कौशल द्वारा 19 अगस्त 2019 से 4 सितंबर 19 तक तिरला जनपद में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

उक्त प्रशिक्षण में सभी ग्राम पंचायतों के सचिव ग्राम रोजगार सहायक रेंजर व डिप्टी रेंजर सहित उपखंड स्त्री समिति के सदस्य प्रशिक्षण में भाग ले रहे हैं।

उक्त जानकारी विकास खंड शिक्षा अधिकारी व मास्टर ट्रेनर अनिल व्यास द्वारा दी गई।

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सम्पादक :- मध्यभारत live न्यूज़

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