विकलांग नारी ने दिया साहस का परिचय

जिला ब्यूरो रितेश बैरागी

इंदौर। हादसे में अपने दोनों हाथ व एक पैर खोने के बाद किसी के लिए जीवन आसान नहीं होता, लेकिन बाणगंगा की रहने वाली एक महिला ने अपने साथ हुए दर्दनाक हादसे को नकार दिया। जीवन की इस चुनौती को स्वीकार करते हुए पहले घर का काम सीखा व अब सिलाई करना भी सीख गई हैं। गरीबी के चलते वह महंगी सिलाई मशीन नहीं खरीद सकी। इसलिए पड़ोसियों के यहां जाकर सिलाई करती है व अपना व बच्चों का भरण-पोषण करने की जद्दोजहद कर रही है।

नौ साल पहले एक बाणगंगा की रहने वाली अनिता सांवले खरगोन जिले के ग्राम भीलगांव अपने मायके गई थी। वहां पर एक खेत में मजदूरी करने के दौरान करंट लग गया। लोग उन्हें लेकर खरगोन पहुंचे जहां पर हालत गंभीर देख इलाज करने से ही मना कर दिया गया। बेहोशी की हालत में उन्हें इंदौर लाया गया। यहां पर लगभग एक माह तक इलाज करने के बाद दोनों हाथ व सीधा पैर काटकर जान बचाई गई। घर आने पर अपने दोनों बच्चों का पालन-पोषण कैसे करें यह समस्या सामने आई तो उसके माता-पिता भी उसके साथ रहे। अनिता के हौसले व पति की मदद से बच्चे अब 5 वीं व 3 री में पहुंच चुके हैं।

संस्थाओं से सिलाई मशीन के लिए मांगी मदद 

अपने को आत्मनिर्भर बनाने के बाद उसने काम करने की सोची। उसने मशीन चलाना सीखा। अब वह इतनी निपुण हो चुकी हैं कि अपने व बच्ची के सलवार सूट खुद ही बना रही है। वहीं आसपास की महिलाएं भी उन्हें कपड़ों की सिलाई का काम देकर जाती हैं। उन्होंने सामाजिक संस्थाओें से सिलाई मशीन व फाल-पीकू मशीन की मांग भी की है। ताकि अपना रोजगार प्राप्त कर सके

संभलना चाहा तो नहीं मिली सफलता

अनिता की तबीयत ठीक होने के बाद उसने काम करने की सोची। पहले जो काम वह सामान्य तरीके से करती थी अब वह मुश्किल भरे हो गए। हाथ से किसी चीज को पकड़ने के दौरान वह पकड़ में नहीं आती थी। कई बार सामान जमीन पर बिखरा। हर काम के लिए उसे मदद की आवश्यकता होती। इसने उसे और दुखी किया। फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी।

सीखने में लगे पांच साल

अनिता को पांच साल का समय लगा फिर से सभी सीखने में। अब वह आटा गुथना, रोटी बनाना, सब्जी बनाना, घर का झाड़ू-पोछा लगाना, बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करना सहित सिलाई का काम भी बखूबी कर रही है। उनके पास सिलाई मशीन नहीं होने से वह पड़ोसी के यहां सिलाई करने जाती है।

पति ने नहीं छोड़ा साथ

हादसे के समय अनिता की बड़ी बेटी याशिका सांवले दो साल व बेटा अंशु सांवले एक साल का था। पत्नी के दोनों हाथ व एक पैर कट जाने के बाद भी उसने उसका साथ नहीं छोड़ने का निर्णय लिया। यहां तक कि हादसा होने के बाद उसके मालिक ने दो लाख रूपये की मदद तक की। उसने अपने काम के साथ ही बच्चों का पोषण भी किया। बाणगंगा कुम्हारखड़ी नाले के पास एक किराए के मकान में यह परिवार अपना जीवनयापन कर रहा है।

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सम्पादक :- मध्यभारत live न्यूज़

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