शारदीय नवरात्र में मां से प्राप्त करे शक्ति

विनोद  चौहान–

धार। चैत्र नवरात्र अपनी शक्तियों को जाग्रत करने और सदवृत्तियों के विकास के लिए उपयुक्त समय है। मां दुर्गा की कृपा और उनकी आराधना करके हम उनसे अपने लिए शक्ति मांग सकते हैं। इस समय हम अपने कुलदेवताओं से भी मार्ग की विपत्तियों को हरने की प्रार्थना करते हैं।

हमारे शास्त्रों में चार नवरात्र बताई गई हैं। इनमें दो गुप्त और दो प्रकट नवरात्र होती हैं। गुप्त नवरात्र आषाढ़ और माघ माह में आती हैं और प्रकट नवरात्र चैत्र और आश्विन मास में। चैत्र नवरात्र का साधना और मां जगदम्बा की पूजा की दृष्टि से विशेष महत्व है।

अपने कुल देवताओं के स्मरण और पूजन के लिए भी यह उपयुक्त तिथि बताई गई है। चैत्र नवरात्र का वैज्ञानिक पक्ष कुछ यूं है कि चैत्र मास से ग्रीष्म ऋतु का आगमन होता है और यहां से हमें अगले कुछ महीनों में कार्य करने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

यह ऊर्जा हमें नौ दिनों माता की भक्ति करने से प्राप्त होती है। जिस तरह दिन की थकान के बाद हम रात्रि में विश्राम करके तरोताजा हो जाते हैं और अगले दिन कार्य करने की ऊर्जा पाते हैं उसी तरह चैत्र नवरात्र जीवन में ऊर्जा का संचार करती हैं। ये रातें अति सूक्ष्म ऊर्जा से परिपूर्ण होती है।

हमारा देश कृषि प्रधान देश है और इस रूप में चैत्र मास में गेहूं, जौ, चना आदि फसल तैयार होकर घरों में आने लगती है और इस कारण हर्ष का वातावरण रहता है और इस नई फसल को ईश्वर का आशीष मानकर उनका धन्यवाद किया जाता है।

चैत्र नवरात्र को वासंतेय नवरात्र भी कहा जाता है और आश्विन मास में आने वाली नवरात्र को शारदीय नवरात्र। चैत्र नवरात्रि प्रभु राम के जन्मोत्सव से जुड़ी है और शारदीय नवरात्र मां से शक्ति प्राप्त करके दुष्ट रावण का अंत करने से।

चैत्र नवरात्र मां की शक्तियों को जगाने का आह्वान है ताकि हम संकटों, रोगों, दुश्मनों, आपदाओं का सामना कर सकें और उनसे हमारा बचाव हो सके। नवरात्र में श्रद्धालु उपवास, संयम, नियम, भजन, पूजन और योग साधना करते हैं। इन नौ दिनों देवी दर्शन मात्र से कष्ट दूर होते हैं।

देवी पुराण के अनुसार मां दुर्गा आदि शक्ति है और सृष्टि के आरंभ में जीवों की उत्पत्ति उन्हीं की कृपा से संभव हुई है। सभी देवी-देवता इस समय मां दुर्गा की आराधना और उनकी स्तुति करते हैं। उनके पूजन में कलश स्थापना का बड़ा महत्व है क्योंकि कलश सौभाग्य और उन्नति का प्रतीक है। चैत्र नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना करके मां से प्रार्थना की जाती है कि यह नया वर्ष सभी के लिए सौभाग्यशाली हो।

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सम्पादक :- मध्यभारत live न्यूज़

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