शासन की जनहितेषी जनसुनवाई योजना बनी महज ओपचारिकता

शासन की जनहितेषी जनसुनवाई योजना बनी महज ओपचारिकता

उच्च अधिकारी समस्याएं सुनते है और विभागीय अधिकारी मोबाइल फोन चलाकर, आपस में बातें कर टाईम पास करके चले जाते हैं। 

राकेश साहु—

सम्पादक मध्यभारत live – धार 

धार। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने आम जनता की परेशानी को दूर करने के लिए स्थानीय स्तर पर जनसुनवाई योजना को लागू किया। जिससे आम आदमी को तहसील व जिला मुख्यालय पर चक्कर न लगाना पड़े इस उद्देश्य से स्थानीय स्तर पर आम लोगों की समस्याओं का निराकरण हो सके। आम आदमी को जिला मुख्यालय या भोपाल के चक्कर न लगाना पड़े। प्रति मंगलवार प्रातः 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक अधिकारी अपने-अपने मुख्यालय एवं कार्यालय में टेबल लगाकर बैठकर आम लोगों की समस्याओं को सुनेगें और मोके पर ही समस्याओं का समाधान करेगे, और मोके पर निराकरण नही हुआ तो आवेदन लेकर निर्धारित समय सीमा में आवेदक की समस्या का समाधान करेगे। आवेदक की समस्या का समाधान न होने की स्थिति में आवेदक ग्राम पंचायत से विकास खंड, विकास खंड से तहसील स्तर पर, और तहसील के बाद जिला मुख्यालय पर आवेदन वरिष्ठ अधिकारी को दे सकते हैं। 

शासन के नियमों के विपरीत अधिकारी बैठते हैं एक ही छत के नीचे

शासन के निर्देश के अनुसार अधिकारियों को अपने- अपने कार्यालय, मुख्यालय पर बैठकर ही आम लोगों की समस्याओं को सुनकर निराकरण करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। किंतु विकासखंड, तहसील और जिला मुख्यालय पर अधिकारी एक ही छत के नीचे बैठकर आवेदन ले रहे हैं। ऎसी स्थिति में आम आदमी अपनी समस्या का आवेदन उच्च अधिकारी को ही देना पसंद करता है और उच्च अधिकारी के पास आवेदन देने वालो की भीड़ लग जाती है और बाकी के अधिकारी फुर्सत में बैठे रहते हैं। उच्च अधिकारी आम लोगों की समस्याएं सुनते है और शेष अधिकारी मोबाइल फोन चलाकर, आपस में बातचीत कर टाईम पास करके दो घंटे तक बैठकर चले जाते हैं। 

जिला कलेक्टर की अनुपस्थिति में अधिकारी करते हैं मनमानी

जनसुनवाई के दौरान अधिकारीयों की खाली रहीं कुर्सियां।

जिला मुख्यालय पर जनसुनवाई के दौरान अगर जिला कलेक्टर जनसुनवाई में न हो, तो अधिकारी अपनी मनमानी करते हुए नजर आते हैं।  अपनी इच्छा अनुसार आते हैं, और उपस्थिती के हस्ताक्षर कर अपनी इच्छा अनुसार उठकर चले जाते हैं। जनसुनवाई के दौरान अधिकारी, मोबाईल फोन पर बिजी रहते हैं, और हंसी मजाक कर बातचीत के दौरान काफी शोर मचाते रहते है। जनसुनवाई को देखकर ऎसा लगता है, कि अधिकारी महज ओपचारिकता पूरी करने के लिए आते हैं, और चले जाते हैं। आवेदक की समस्या का समाधान नहीं होने से आवेदक निराश होकर चले जाते है। आम लोगों का भरोसा व विस्वास जनसुनवाई से मानो उठता सा दिखाई दे रहा है। 

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सम्पादक :- मध्यभारत live न्यूज़

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