सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर लगाई रोक !

सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर लगाई रोक !

सुप्रीम कोर्ट ने दिया ग्रीन पटाखे चलाने का आदेश,दुकानदारों को पता नहीं होते कैसे हैं…!!

भोपाल  : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद दिल्लीवासी अगले साल ही ग्रीन पटाखे जला सकेंगे क्योकि इसकी वजह यह है कि दुकादारों को ग्रीन पटाखों के बारे में कुछ पता ही नहीं है। कुछ दुकानदार फुलझड़ी, अनार और चरखी को ही ग्रीन पटाखा बताकर बेच रहे हैं, लेकिन पटाखा एसोसिएशन का कहना है कि यह ग्रीन पटाखों की श्रेणी में नहीं आते।

सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ ग्रीन पटाखों की अनुमति दी 

सुप्रीम कोर्ट ने बीते मंगलवार को देशभर में कम कम प्रदूषण करने वाले ग्रीन पटाखे बनाने और बिक्री की अनुमति दी थी, लेकिन पटाखा एसोसिएशन की मानें तो ग्रीन पटाखों को लेकर बाजार में असमंजस की स्थिति हैलोगो को पता ही नहीं ग्रीन पथके होते क्या है ।

दुकानदारों की प्राथमिकता में पटाखों का पुराना स्टॉक बेचना शामिल है। पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस कारण पटाखों की बिक्री नहीं हो सकी थी। बताया जा रहा  है कि लगभग  50 लाख किलोग्राम पटाखों का स्टॉक कारोबारियों के पास बचा हुआ है।

इनका कहना है की कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं…!!

दिल्ली फायर वर्क्स एंड जनरल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान नरेंद्र गुप्ता बताते हैं कि उनकी नजर में ग्रीन पटाखों को लेकर अब तक कोई  परिभाषा नहीं बनी है।

इधर आम जानो का कहना है की ग्रीन पटाखा नाम की कोई चीज सुनने को मिली है…!!

गुप्ता ने बताया कि बाजार में ग्रीन पटाखा उपलब्ध होने में कम से कम एक साल लग जाएगा। अगले वर्ष ही दिल्ली में ग्रीन पटाखों की खेप पहुंच सकेगी। मौजूदा समय में पटाखों का पुराना स्टॉक बेचा जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में पटाखा बनाने वाली एक नामी कंपनी ने याचिका दाखिल की है। इसमें इतने सीमित समय में ग्रीन पटाखे बाजार में उपलब्ध कराने में मुश्किल जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जिन पटाखों की बिक्री नहीं करने के निर्देश दिए हैं, वह बाजार में धड़ल्ले से बिक रहे हैं। लड़ी और सुतली बम बेचने वाली दुकानों पर लोगों का तांता लगा हुआ है पटाखे खरीददार राकेश  ने बताय की हमें ग्रीन पटाखों के बारे में जानकारी नहीं ह बाजार में जो उपलब्ध है हम वही खरीद रहे है। 

पेसो से मान्यता प्राप्त पटाखे उपलब्ध…!!

दिल्ली-एनसीआर फायर वर्कस ट्रेडर्स एसोसिशन से जुड़े राजीव जैन बताते हैं कि बाजार में अभी सिर्फ केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन आने वाले पेट्रोलियम तथा विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेसो) से मान्यता प्राप्त पटाखों की बिक्री होती है। पेसो पटाखों के उत्पादन और बिक्री को लेकर नियमावली तय करती है।

इस मामले में विक्रेता का कहना …!!

ग्रीन पटाखों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। वर्ष 2005 में पटाखों की बिक्री को लेकर जो नियमावली बनी थी। उसी के अनुसार बाजार में पटाखों की बिक्री की जा रही है। 
ग्रीन पटाखों पर अभी शोध हुआ है। ऐसे में उत्पादन इतनी जल्दी शुरू नहीं हो सकता है। हमें तमिलनाडु के शिवकाशी से बाजार से  ग्रीन पटाखों के आने का इंतजार है। ग्रीन पटाखों के बारे में हमे कुछ नहीं पता है। अभी तो पूरा ध्यान पुराना माल बेचने में है। 

इन पटाखों को ग्रीन पटाखों की श्रेणी में लेना चाहिए 

फुलझड़ी, अनार और चरखी को ग्रीन पटाखों की श्रेणी में रखा जा सकता है। इनसे ध्वनि प्रदूषण बिल्कुल नहीं होता है। सुप्रीम कोर्ट को भी ऐसे पटाखों को लेकर स्पष्ट तौर पर बताना चाहिए था। अभी पटाखों का पुराना स्टॉक बेच रहे हैं। 

असोसिएशन ने की अपील 

दुकानदारों से अपील है कि वह सुतली बम और लड़ी न बेचें। हम अपील करते हैं कि पटाखा विक्रेताओं के लाइसेंस पुन: बहाल हों। करीब 400 अस्थायी पटाखा विक्रेताओं को लाइसेंस जारी होने का इंतजार है।– नरेंद्र गुप्ता, प्रधान, दिल्ली फायर वक्र्स एंड जनरल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन, सदर बाजार। 

क्या हैं ग्रीन पटाखे…!!

वह पटाखे जिनके जलने और चलाने पर कम प्रदूषण होता हो। यह पटाखे सामान्य पटाखों की तरह होते हैं। इनको जलाने पर नाइट्रोजन और सल्फर ऑक्साइड गैस का कम उत्सर्जन होता है। इन पटाखों को तैयार करने में एल्यूमीनियम का कम प्रयोग होता है। इनके लिए खास रसायन का इस्तेमाल किया जाता है। 

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सम्पादक :- मध्यभारत live न्यूज़

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