सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को दिए आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को दिए आदेश

उज्जैन। लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण करने के लिए पॉक्सो एक्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक और अनुकरणीय पहल की सुरुवात की गई। जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में 21 लाख स्र्पए की लागत से तैयार हुए बाल हितैषी न्यायालय (चाइल्ड फ्रेंडली कोर्ट) का मंगलवार को मप्र हाईकोर्ट खंडपीठ इंदौर के पोर्टफोलियो न्यायाधिपति रोहित आर्या ने लोकार्पण किया। इसे देश का पहला बाल हितैषी न्यायालय बनने का गौरव प्राप्त हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों में ऐसे न्यायालय खोलने के आदेश दिए हैं। उज्जैन से शुरुआत की गई है।

मुख्य अतिथि आर्या ने कहा कि चाइल्ड फ्रेंडली कोर्ट के लिए बच्चों के काउंसलर्स को विशेष ट्रेनिंग दी जाए। इस तरह के प्रकरणों में न्यायाधीशों को पीड़ित बच्चों के साथ बिलकुल अपने बच्चों की तरह व्यवहार करना चाहिए। ऐसे मामलों में संवेदनशीलता बहुत जरूरी है। म,प्र, राज्य अधिवक्ता परिषद के सदस्य प्रताप मेहता और मंडल अभिभाषक संघ के अध्यक्ष अशोक यादव विशेष अतिथि थे।

अध्यक्षता जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसकेपी कुलकर्णी ने की। श्री आर्या को भगवान महाकालेश्वर का चित्र भेंट किया गया। डॉ.प्रकाश चौबे, भगतसिंह चावड़ा, राजेश जोशी, शैलेष मनाना, अजयशंकर तिवारी, अमित कुमार मिश्रा, योगेश शर्मा, हेमंत वाड़िया, धर्मेंद्र बागेला, देवेंद्र राय, राजकुमार गुप्ता सहित अनेक एडवोकेट उपस्थित थे। संचालन कोर्ट मैनेजर अनंदा पद्मावत ने किया। आभार तृप्ति पांडेय ने माना।

बयान के लिए आने वाले बच्चों को मिलेगा भयमुक्त माहौल

न्यायालय में बतौर सुरक्षा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। एक एक्यूस्ड बॉक्स भी बनाया गया है, जो चारों तरफ काली फिल्म की परत वाला होगा। उसमें आरोपित को बैठाया जाएगा, ताकि बच्चा उसे देख न सके और भयमुक्त माहौल में अपने बयान दर्ज करा सके।

न्यायालय में गवाही देने के लिए पेश होने वाले बच्चों को बिल्कुल पारिवारिक माहौल दिया जाएगा। कोर्ट की दीवारों पर कार्टून बनाए गए हैं ताकि बच्चा सहज रह सके। कुछ दिनों में यहा खिलौने आदि की भी व्यवस्था की जाएगी। बता दें की सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से चाइल्ड फ्रेंडली कोर्ट खोलने को कहा है।

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सम्पादक :- मध्यभारत live न्यूज़

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