परिवहन अधिकारी का तबादला, गुप्ता को मिला अतिरिक्त प्रभार।

स्थानांतरित प्राचार्य दो सप्ताह बाद भी नहीं हुए कार्यमुक्त, लगे हे जोड़तोड़ में

स्थानांतरित प्राचार्य दो सप्ताह बाद भी नहीं हुए कार्यमुक्त, लगे जोड़तोड़ में।

कार्यकारी संपादक राकेश साहू—

धार। प्रशासकीय रूप से डिंडोरी स्थानांतरित किए गए शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय केसूर के विवादित प्राचार्य ओम प्रकाश अग्रवाल शासन के आदेश की खुलेआम अवहेलना करते हुए लगभग दो सप्ताह बाद भी कार्य मुक्त नहीं हो रहे हैं। अग्रवाल 1 – 2 दिन छोड़कर संकुल पर आते हैं, और कैशबुक लिखने का नाटक करते हुए रिलीव होने की बात प्रचारित करते हैं, लेकिन  जनचर्चा अनुसार वे शासन के आदेश के विरुद्ध हाई कोर्ट से स्टे लेने के लिए एवम ट्रान्सफर निरस्त करवाने के जोड़तोड़ में लगे हैं। अग्रवाल लोगों व अधिकारियों  से ऐसा लिखवाने की जुगत में भी है कि उनके केसूर से जाने से शिक्षण व्यवस्था गड़बड़ा जाएगी, जो बहुत हास्यास्पद है। अग्रवाल के कार्यकाल में ही संकुल की सबसे अधिक दुर्दशा हुई वही हाईस्कूल का परीक्षा परिणाम बेस्ट ऑफ फाइव पद्धिति के बाद भी मात्र 54 प्रतिशत रहा, नहीं तो  अग्रवाल के ज्वॉइन करने से पूर्व केसूर का हाईस्कूल, हाई सेकेंडरी का परीक्षा परिणाम बेस्ट ऑफ फाइव पद्धति ना होने पर भी 100 प्रतिशत रहा है।

प्राचार्य अग्रवाल मंगलवार व गुरुवार को भी संकुल पर  बैठे कर कैशबुक लिखने का नाटक करते रहे लेकिन बुधवार को गायब रहे। गंभीर शिकायतों के चलते व उनमें जांच के बाद दोषसिद्ध होने पर, लोकायुक्त में प्रकरण चलने पर प्रमुख सचिव, आदिम जाति कल्याण मंत्रालय भोपाल ने अग्रवाल का स्थानांतरण डिंडोरी कर दिया है। स्थानांतरण नीति में यह शर्त है कि 2 सप्ताह तक यदि स्थानांतरित कर्मचारी अधिकारी स्वयं कार्यमुक्त ना हो तो उसे एकतरफा कार्य मुक्त किया जाए। इस संबंध में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा राज्य शासन को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए प्राचार्य को एकतरफा भोपाल से ही कार्यमुक्त किए जाने का अनुरोध किया गया है। अग्रवाल द्वारा इस माह स्वयंका वेतन भी आहरित कर लेने तथा कार्यमुक्त ना होने के लिए उनके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग प्रमुख सचिव व आयुक्त श्रीमती दीपाली रस्तोगी से भी की गई है।

हाईकोर्ट कर सकता है! अग्रवाल के विरूद्ध कार्रवाई

प्राचार्य अग्रवाल के हाइकोर्ट जाने के संबंध में जब हमारे संवाददाता ने विधि विशेषज्ञों से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार में लिप्त प्राचार्य ओमप्रकाश अग्रवाल यदि हाईकोर्ट में जाता हैं, तो शासन हाईकोर्ट में जवाब प्रस्तुत करते समय प्राचार्य अग्रवाल के द्वारा किए गए भ्रष्टाचार के सबूत, जांच रिपोर्ट, लोकायुक्त में दर्ज प्रकरण, तीन वेतन वृद्धियाँ रोके जाने के आदेश, वर्तमान में चल रही जांचे आदि सभी सबूतों के तौर पर अपने जबाब में पेश करेगा, इस पर हाईकोर्ट उल्टे अग्रवाल के ही विरुद्ध कार्रवाई के आदेश दे सकता है। कई प्रकरणों में पहले ऐसा हुआ भी है।

Follow Us

सम्पादक :- मध्यभारत live न्यूज़

%d bloggers like this: