धार। नवरात्रि के दौरान जप, तप, साधना और हवन का बड़ा महत्व है। हवन को ज्यादातर घरों, मंदिरों और साधनास्थलों में पूर्णाहूति के रूप में लिया जाता है। पहले दिन देवी स्थापना के साथ नवरात्र पर्व का प्रारंभ होता है और हवन के साथ इस पर्व का समापन हो जाता है। हवन को वातावरण की शुद्धि का बेहतर साधन माना गया है। अनादिकाल से ऋषि-मुनि हवन और मंत्रोच्चार से देव आराधना करते आ रहे हैं। नवरात्रि और कुछ विशेष पर्वों पर हवन का महत्व कई गुना बड़ जाता है।