150 वर्ष बाद बना है, ऐसा सर्वार्थ सिद्धि योग

150 वर्ष बाद बना है, ऐसा सर्वार्थ सिद्धि योग

धर्म/ज्योतिष। सोमवार को सर्वार्थ सिद्धि योग में एकसाथ शनि जयंती, सोमवती अमावस्या व वट सावित्री पर्व मनाया जाएगा। लोगों की जिन राशियों में भगवान शनि का ढैय्या या साढ़ेसाती चल रही है, ऐसे जातक यदि शनिदेव का तिल से अभिषेक करेंगे तो उन पर साढ़ेसाती का असर कम हो जाएगा। वहीं, सोमवती अमावस्या पर महिलाएं पूजा-अर्चना कर पति की दीर्घायु की कामना करेंगी।

वट सावित्री पर्व पर महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य एवं सुख समृद्धि के लिए वट वृक्ष में कच्चा धागा लपेटते हुए परिक्रमा कर पूजा करेंगी। मां चामुंडा दरबार के पुजारी पं. राम जीवन दुबे व ज्योतिषाचार्य विनोद रावत ने बताया कि यह महासंयोग 149 वर्ष बाद बन रहा है। इसके पहले एक दिन तीनों पर्व मनाने का संयोग 30 मई 1870 को बना था। सर्वार्थसिद्धि का योग पूरे दिन व रातभर रहेगा।

 होगी वट सावित्री की पूजा

वट सावित्री पर्व पर शीतलदास की बगिया व अन्य मंदिरों, घरों में दोपहर 12 से एक बजे के बीच महिलाओं द्वारा पूजा की जाएगी। सोमवती अमावस्या के दिन ही सावित्री अपने पति परमेश्वर सत्यवान के प्राण यमराज से बचाकर लाई थी इसलिए महिलाएं वट वृक्ष में कच्चा सूत, लपेटते हुए 108 परिक्रमा कर पूजा-पाठ करती हैं।

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सम्पादक :- मध्यभारत live न्यूज़

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