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Danger of rolling Shivraj chair without seeing!

Danger of rolling Shivraj chair without seeing!

बिना दर्शन किए लोटे शिवराज कुर्सी का खतरा !

शिव की नगरी में बिना दर्शन किए लोटे शिवराज किसान मोर्चा के समापन कार्यक्रम में पहुंचे थे।

ओंकारेश्वर/खंडवा। (ललित दुबे) शिव की नगरी ओकारेश्वर पहुंचे शिवराज 2 घंटे बिताने के बाद हेलीपैड से भोपाल के लिए रवाना। प्रदेश व्यापी किसान मोर्चा के दो दिवसीय कार्यक्रम के समापन के अवसर पर पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ प्रदेश अध्यक्ष वि डी शर्मा व भारतीय जनता पार्टी के अनेक नेताओ के साथ क्षेत्रीय सांसद व भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

प्रशासनिक प्रोटोकॉल के 1 घंटे विलंब से कोठी हेलीपैड पर पहुंचे प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान का क्षेत्रीय नेताओं ने हेलीपैड पर स्वागत किया। सड़क मार्ग से मात्र 6 किलोमीटर दूर बंधन होटल पर निर्धारित कार्यक्रम में उपस्थित हुए मुख्यमंत्री एवं प्रदेश अध्यक्ष का किसान मोर्चा पदाधिकारियों ने स्वागत किया। किसान मोर्चा के कार्यक्रम को संबोधित करने के बाद पूर्व की तरह प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान बगैर पत्रकारों से मिले सीधे हेलीपैड से वापस रवाना हो गए।

सूत्रों ने बताया कि क्षेत्र में अत्यधिक वर्षा के चलते डूब प्रभावित क्षेत्र के किसान अपनी समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने के लिए बाहर खड़े रहे। किसान मोर्चा के खंडवा एवं खरगोन के वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने गरीब किसानों को मुख्यमंत्री से नहीं मिलने दिया जो चर्चा का विषय बना रहा।

इधर मीडिया के पत्रकार साथी भी प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा धार्मिक नगरी ओकारेश्वर में आने वाले शिव भक्तों की सुविधा के लिए करोड़ों रुपए के पैकेज प्रसादम योजना के अंतर्गत पर्यटन विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों का 2 वर्ष बाद भी भूमि पूजन एवं की गई घोषणाओं पर अमल नहीं किए जाने, ममलेश्वर मंदिर को ट्रस्ट बनाने। घाटों के पुनर्निर्माण तथा स्टॉप डेम इत्यादि को लेकर प्रश्नों की झड़ी लिए खड़े रह गए। 

मुख्यमंत्री मिडिया से बगैर मुखातिब हुए सीधे हेलीपैड स्थल की ओर रवाना हो गए और पत्रकार खड़े के खड़े रह गए।

Danger of rolling Shivraj chair without seeing!
Danger of rolling Shivraj chair without seeing!

उल्लेखनीय है कि पत्रकारों को कार्यक्रम स्थल से भी मोर्चा के पदाधिकारियों द्वारा यह कहकर वेटिंग हॉल में बैठने के लिए कहा था कि मुख्यमंत्री जी आप से सीधे ही आकर मिलेंगे किंतु भारतीय जनता पार्टी एवं किसान मोर्चा के कुछ पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को मीडिया कर्मी से दूर रखते हुए पिछले दरवाजे से रवाना कर दिया।

बगैर दर्शन के लोटे प्रदेश के मुखिया—

उल्लेखनीय है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ज्योतिर्लिंग भगवान ओकारेश्वर में बिना दर्शन किए ही लोटे गए। आपको बता दे की इसके पूर्व भी प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी मांधाता विधानसभा क्षेत्र में आगमन पर ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर के बिना दर्शन किए लौटने का परिणाम यह रहा था कि उन्हें अपनी कुर्सी से नीचे उतरना पड़ा था।

जानकार सूत्रों ने बताया कि शिव की नगरी में आए शिवराज सरकार के मुखिया बिना शिव के दर्शन किए लोटे हे तो कहीं संकट के बादल मँडराने न लग जाए। जिसके परिणाम स्वरूप कहीं कुर्सी से हाथ नहीं धोना पड़े, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन द्वारा मंदिर में भी पूरी तैयारी कर रख़ी थी शिवराज के भगवान शिव के दर्शन ना करने के कारण की गई तैयारीयां धरी की धरी रह गई।

मंदिर प्रशासन द्वारा की गई तैयारी धरी की धरी रह गई तथा जिला प्रशासन द्वारा पुलिस प्रशासन द्वारा झूला पुल पर ही यात्रियों को मुख्यमंत्री की संभावित दर्शन करने की संभावना के तहत रोक दिया गया था। मुख्यमंत्री के नहीं आने से मंदिर प्रशासन द्वारा की गई तैयारी धरी की धरी रह गई वहीं काफी देर तक दर्शनार्थियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 5 वर्ष पूर्व में ज्योतिर्लिंग ओमकारेश्वर की नगरी में आगमन हुआ था। जहां पर उन्होंने जिन सुविधाजनक घोषणाओं का घोषणा पत्र जारी किया था। वह मानो हवा में उड़ती रह गई, वर्षों बीत जाने के बाद किसी भी योजना का आज तक फिता नहीं कट पाया। योजनाएं प्रशासन का मुंह ताक रही है, ओकारेश्वर नगर परिषद में करीब 15 वार्ड हैं, जो घनी झाड़ियों के बीच बसे हुए हैं। वहां पर मद परिवर्तन को लेकर भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी प्रकार चलता रहा तो इस बार नगर परिषद ओकारेश्वर भाजपा विहीन दिखाई दे रही है।

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव एवं विधानसभा उपचुनाव के दौरान की गई घोषणाएं उनके साथ ही लोकसभा उपचुनाव के समय भी की गई घोषणाएं सिर्फ घोषणाएं ही रह गई, जो अभी तक मैदानी स्तर पर नहीं दिखाई दे रही है। क्या ओंकारेश्वर की नगरी सिर्फ घोषणाओं पर ही आधारित रहेगी या तीर्थ नगरी में विकास की गंगा बहेगी !

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सम्पादक :- मध्यभारत live न्यूज़

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