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प्राचीन हिंगलाज माता मंदिर में अष्टमी को होगा हवन एवं विशेष श्रृंगार

प्राचीन हिंगलाज माता मंदिर में अष्टमी को होगा हवन एवं विशेष श्रृंगार

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बडनगर/उज्जैन। सम्पूर्ण भारतवर्ष में शारदीय नवरात्रि नौ दिनों तक बड़े ही धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। माता के भक्तों द्वारा प्राचीन काल से चली आ रही परंपरा अनुसार मां के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती हैं। सभी भक्तों के द्वारा मां के स्वरूपों को अपनी परंपरा अनुसार कहीं पर मां की छड़ी लगाकर गरबे किए जाते हैं, तो कहीं पर मां की बाड़ी लगाई जाती है जिसमें जवारे लगाया जाते हैं। कई भक्त 9 दिनों तक बगैर अन्न के 9 दिनों तक कठोर तप करते हैं। मां के कई स्थान विश्व विख्यात हैं, जिनमें से एक अति प्राचीन हिंगलाज माता का मंदिर भी मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील अंतर्गत रंगारसेरी में करीब 200 वर्ष पुराने समय से स्थापित है।

प्राचीन हिंगलाज माता मंदिर में अष्टमी को होगा हवन एवं विशेष श्रृंगार

आपको बता दे की हिंगलाज माता का प्रमुख स्थान मंदिर पाकिस्तान मे बलूचिस्तान के दक्षिण की पहाड़ियों में प्रमुख धर्म स्थल है। यह धर्मस्थल आज भी हिंदु मुस्लिम एकता का प्रतीक है। इस धर्म स्थल को नानी का हज भी कहा जाता है। पुराने समय में गोस्वामी समाज के बंधु यहां का तीर्थ करने जाया करते थे। पूर्वजों द्वारा हिंगलाज माता की मूर्ति वहां से लाकर स्थापित की गई थी।

मंदिर पुजारी देवपुरी गोस्वामी महाराज द्वारा बताया गया कि यहां नवरात्रि में मां की 9 दिनों तक विशेष पूजा अर्चना की जाती हैं, जिसमे प्रतिदिन मां के अलग-अलग स्वरूपों का श्रृंगार किया जाता है। महा अष्टमी के दिन मां का विशेष श्रृंगार होता है हवन पूजन भी होता है। जिसके बाद कन्या पूजन किया जाता है और कन्याओं को भोजन प्रसादी वितरित की जाती है।

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