Madhyabharatlive (MBL) News

"with the truth"

कोरोना संक्रमण-काल में झोलाछाप कैसे कर रहे इलाज

Spread the love

जबलपुर। मध्य प्रदेश की जबलपुर हाई कोर्ट में झोलाछाप के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर जवाब-तलब कर लिया है। इसके लिए राज्य शासन, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, पुलिस महानिरीक्षक, संभागायुक्त जबलपुर, कलेक्टर-एसपी और सीएमएचओ जबलपुर को चार सप्ताह की मोहलत दी गई है। मामला कोरोना संक्रमण-काल में झोलाछाप द्वारा मनमाने तरीके से इलाज किए जाने के रवैये को चुनौती से संबंधित है। अगली सुनवाई 26 जून को होगी।

मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार मित्तल व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान जनहित याचिकाकर्ता साठिया कुआं, जबलपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता ऋषिकेश सराफ की ओर से अधिवक्ता परितोष गुप्ता ने पक्ष रखा। उन्होंने वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए दलील दी कि एक तरफ कोरोना संक्रमण जैसी वैश्विक विडंबना सामने है, दूसरी तरह जबलपुर सहित राज्य भर में झोलाछाप धड़ल्ले से एलोपैथिक इलाज के जरिए मरीजों की जान लेने पर तुले हुए हैं। जिनके पास आयुर्वेदिक-होम्योपैथिक या अन्य तरह की डिग्री-डिप्लोमा आदि हैं, वे अंग्रेजी दवाएं लिखते हैं और सर्दी-जुखाम, बुखार आदि के लक्षणों के आधार पर मरीजों का उपचार कर रहे हैं। यह स्थिति बेहद खतरनाक है। इससे कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा भी बना हुआ है।

28 झोलाछाप की लिखित शिकायत पर कार्रवाई नदारद

जनहित याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि अकेले जबलपुर में 28 झोलाछाप की नामजद शिकायत की गई। इसके बावजूद उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई नदारद रही। न तो उनके खिलाफ केस दर्ज हुए, न गिरफ्तार किया गया और न ही क्लीनिक सील किए गए। इससे उनके हौसले बढ़े हुए हैं। जाहिर सी बात है कि स्वास्थ्य विभाग से सांठगांठ के बिना झोलाछाप का अस्तित्व संभव ही नहीं है।

13 दोषी पाए गए, जिनमें से सिर्फ 5 पर कार्रवाई 

हाई कोर्ट को अवगत कराया गया कि बार-बार शिकायत करने पर 28 में से 13 दोषी पाए गए। उनमें से महज 5 के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर रस्म अदायगी के जरिए कर्त्तव्य की इतिश्री कर ली गई। आश्चर्य की बात तो यह है कि इस तरह के झोलाछाप के पास न तो संबंधित परिषद का पंजीयन है और न ही सीएमएचओ कार्यालय से अनुमति। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना काल में झोलाछाप पर नकेल कसने के लिए पुलिस महानिरीक्षक के समक्ष एक रिपोर्ट पेश की थी। इसके बाद एसपी को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए। संभागायुक्त व कलेक्टर ने भी मामले को गंभीरता से लिया, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई के अभाव में झोलाछाप समाज के लिए खतरा बने हुए हैं। लिहाजा, हाई कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप करे।

Follow Us