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Fake certificates of vaccination were also issued!.

वैक्सीनेशन के फर्जी प्रमाण पत्र जारी होने की सूचना !

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जिला प्रशासन वेक्सिनेशन नहीं करवाने वालों पर  प्रतिबंधित कार्यवाही करेगा?

स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने आंकड़ेबाजी कर समाचार पत्रों को प्रेस नोट व फोटो भेजकर दिखावे की वाहवाही लूटने का किया प्रयास !

धार। कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान लगातार केबिनेट की बैठक ले रहे हैं और प्रशासनिक अधिकारियों को एहतियात बरतने के लिए सख्त कदम उठाने के लिए कवायद कर रहे हैं। सुरक्षा व सावधानी बरतने के निर्देश भी जारी कर कोरोना गाइडलाइंस को पुनः लागू करने व क्राइसिस समिति की बैठक आयोजित करने के निर्देश भी दिये गए हैं। प्रदेश में कोरोना पर नियंत्रण करने में वेक्सिनेशन की अहम भूमिका रही हैं। वेक्सिनेशन के लिए राज्य सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से अभियान चलाया औऱ प्रदेश में युद्ध स्तर पर अधिक से अधिक वेक्सिनेशन कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। फिर भी कुछ लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है और वेक्सिनेशन नही करवाया है ऐसे लोगो पर राज्य सरकार डोर टू डोर अभियान चलाकर ढूढने का काम किया जा रहा है। वेक्सिनेशन नही करवाने वालों पर नियंत्रण करने के लिए प्रतिबंध भी लगाये गए हैं, किन्तु उन निर्देशो का पालन कुछ जिलो के कलेक्टर ने सख्ती से करवाया है और कुछ जिलो में नरमी बरती गई हैं।

क्या राज्य सरकार कोरोना जैसी जानलेवा गंभीर बीमारी से निपटने के लिए वेक्सिनेशन अभियान पर औऱ अधिक प्रभावशाली तरीके से जोर देगी? प्रचार प्रसार कर वेक्सिनेशन करवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। फिर भी वेक्सिनेशन से वंचित रहे लोगो पर प्रतिबंधित कार्यवाही होती हैं तो वेक्सिनेशन 100 प्रतिशत तक हो सकता हैं।

प्रशासकीय स्तर पर शासकीय कार्यालयों के कर्मचारियों का वेतन आहरित नहीं हो रहा है। इसी प्रकार प्रायवेट सेक्टर में भी दैनिक कर्मचारियों के वेक्सिनेशन प्रमाण पत्र होने पर ही कार्य करने की अनुमति दी जा रही हैं। जिन लोगों ने वेक्सिनेशन नही करवाया है। उनके दैनिक जीवन में होने वाले कार्य बैंक, पेट्रोल पंप, शासकीय कार्यालयों में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाकर वेक्सिनेशन प्रमाण पत्र की जांच होना चाहिए। व्यवसायी वर्ग, छोटे बड़े दुकानदार, हाथ ठेला व्यापारियों, कार्य करने वाले कर्मचारियों के वेक्सिनेशन प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से जांच की जाय। क्या जिला प्रशासन के आला अधिकारी इस और ध्यान देकर सख्त कदम उठाएंगे? तभी वेक्सिनेशन 100 प्रतिशत हो सकेगा।

वैक्सीनेशन के फर्जी प्रमाण पत्र भी हुए जारी!

विशेष सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विशेष समुदाय के लोगों ने वेक्सिनेशन में रूचि नही दिखाई औऱ वेक्सिनेशन नहीं करवाया औऱ वेक्सिनेशन प्रमाण पत्र भी जुगाड़ से प्राप्त कर लिया है! ऐसी जनचर्चा हैं कि विशेष समुदाय के कर्मचारियों की ड्यूटी वेक्सिनेशन के कार्य में भी लगाई गई थी और उन्होंने कंप्यूटर में इंट्री कर दी औऱ वैक्सीन नहीं लगाई। औऱ कुछ लोग ऐसे भी रहे कि वेक्सिनेशन सेंटर पर गये औऱ आधार कार्ड से इंट्री करवाई औऱ सेंटर पर बैठे रहे और घूम फिरकर बगैर वैक्सीन लगाए चुपचाप वापस आ गए।

स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वेक्सिनेशन सेंटर पर एक हजार वैक्सीन दी गई थी और उसी सेंटर की रिपोर्ट में 1300 लोगों को वेक्सिनेशन किया गया। रिपोर्ट में बताया गया है। वैक्सीन की संख्या से अधिक लोगों को वेक्सिनेशन लगाई गई। ऐसी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के द्वारा पूर्व में जारी की गई थी। ग्रामीण क्षेत्रों व शहरी क्षेत्रों में दिए गए वैक्सीन के डोज से अधिक लोगों को वेक्सिनेशन होना बताया गया था जो कि आश्चर्यजनक रिपोर्ट रही!

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने दिखावे के लिए समाचार पत्रों का लिया सहारा!

स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों ने दिखावे के लिए फील्ड में काम कम किया औऱ दिखावे के लिए फोटो व समाचार बनाकर रिलीज कर दिया। समाचार पत्रों के माध्यम से प्रचार प्रसार पाने का झूठा प्रयास किया गया है जबकि धरातल पर ठोस कदम नहीं उठाए हैं। लापरवाही बरती गई है। कागजों में आंकड़ेबाजी का खेल किया गया है। वेक्सिनेशन में कर्मचारी मात्र ड्यूटी की ओपचारिकता निभाते नजर आया। गंभीरता पूर्वक कार्य नहीं किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने खूब आंकड़ेबाजी का खेल खेलकर वाहवाही लूटने का प्रयास किया है। राज्य सरकार के द्वारा संसाधनों की कमी नहीं आने दी गई किँतु अफसरों के द्वारा उन्हें विधिवत संचालित करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी रही औऱ उनके रखरखाव पर अधिक व्यय बताया जाता हैं। मतलब जितना उपयोग आम आदमी के लिए नहीं हो सका उससे अधिक राशि के बिल रखरखाव पर खर्च किये गए हैं। उच्च स्तरीय जांच हो तो बड़ा खुलासा सामने आ सकता है। इसी प्रकार कोरोना काल में कर्मचारियों की भर्ती की गई और कुछ लोगों को बाहर भी कर दिया गया है। शासकीय राशि का जमकर दुरुपयोग होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।

खबर, राकेश साहू धार।

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