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महाभारत कालीन है मंदिर की बनावट।

महाभारत कालीन है मंदिर की बनावट

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नवरात्रि में दर्शन मात्र से मनोकामना होती है पूर्ण, नवरात्रि के नो दिनों तक स्वर्ण मुखोटे में होते है देवी माँ के दर्शन। 

कुक्षी/धार। मालवा निमाड़ के 72 गाँवो की कुलदेवी होने के साथ-साथ महाराष्ट्र और गुजरात से भी भक्त आते है बाघ। माँ दरबार  में हाजरी के साथ दर्शन कर धन्य हो जाते है।

आपको बता दे की धार जिले में भी माता रानी देवी माँ के अनेक बड़े-बड़े और प्राचीन पुरातन मन्दिर स्थित है। इन मन्दिरो का इतिहास भी कोई कम नही है। अधिकांश देवी मंदिर यहाँ महाभारत कालीन ही बताए जाते है। इन देवी शक्ति मन्दिरो में से एक विराट नगरी बाग में माँ बाघेश्वरी देवी का मंदिर भी है जो अपने आप मे भक्तो की मनोकामना पूर्ण करने के साथ अनेक परिवारों की कुल देवी के रूप में जाना भी जाता है।

मंदिर में यू तो वर्ष भर प्रतिदिन भक्तो की भीड़ रहती है। माता के दर्शन के लिए परन्तु प्रति मंगलवार और दोनो ही चेत्र एवं शारदीय नवरात्रि पर यहाँ भक्तो की कतार टूटती ही नही है। नवरात्रि पर्व मन्दिर में परम्परा ओर उत्साह पूर्वक मनाया जाता है। जो परम्परा बरसो बरस से चली आ रही है।

मन्दिर में नवरात्रि पर्व को लेकर कुछ परम्पराए है जिसे पीढ़ी दर पीढ़ी निभाया जा रहा है। मन्दिर में पुरानी दिप माला भी बनी हुई है जिस पर नियमित तो दीपक प्रज्वलित नही परंतु दीपावली के दिन जरूर वर्ष में एक बार किया जाता है। वही एक ओर पुरानी परंपरा इस मंदिर की है कि यहाँ दोनो ही नवरात्रि में माता जी को स्वर्ण मुखोटा पहनाया जाता है। जिसे दशहरा की रात्रि में वापस उतार लिया जाता है। यानी कि नो रात्रि के नो दिनों तक भक्तो को माँ बाघेश्वरी के दर्शन स्वर्ण मुखोटे के रूप में ही होते है।

सबसे महत्वपूर्ण यह है कि नवरात्रि के नो दिनों तक होने वाली सँध्या आरती में माँ बाघेश्वरी का श्रंगार भक्तो का मन मोह लेती है और भक्त माता के श्रंगार को एकटक निहारते ही रहते है। इस आरती में सबसे ज्यादा भक्तो की भीड़ रहती है। वैसे तो नवरात्रि के प्रथम दिन सुबह से मन्दिर में महा आरतिया शुरू हो जाती है जो पूरे नो दिनों तक जारी रहती।

मन्दिर परम्परानुसार प्रतिदिन सुबह 5 बजे काकड़ा आरती, 7 बजे मंगला आरती, 11 बजे राजभोग आरती के बाद शाम को संध्या आरती 7 बजे ओर शयन आरती रात्रि 9 बजे नवरात्रि के प्रत्येक दिवस होती है। आरती में भी बड़ी संख्या में भक्तगण भाग लेते है।

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