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नगर में इस बार नहीं होगा रावण दहन आखिर क्यों

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धार। जिले की सरदारपुर तहसील अंतर्गत राजगढ़ नगर में इस बार रावण दहन नहीं होगा। आपको बता दें कि रावण दहन को लेकर नगर परिषद द्वारा कोरोना गाईड लाईन के तहत जारी आदेशो का हवाला देते हुए अनुमति नहीं दी गई है। वहीं दूसरी ओर साप्ताहिक हाट बाजार में पशु मेले को दी जा रही है खुली छूट। व्यापारी उड़ा रहे कोरोनावायरस इन की धज्जियां पशु मंडी मैं लग रही भीड़।

गौरतलब है कि पिछले दिनों राजगढ़ पुलिस थाने पर नवरात्रि और दशहरा पर्व के आयोजनो को लेकर शांति समिति की बैठक रखी गई थी। जिसमे अधिकारियों द्वारा कोरोना गाईड लाईन के पालन अनुसार शासन द्वारा जारी आदेश के तहत सीमित छूट के साथ आयोजन करने की अनुमति प्रदान करने की बात कही गई। जिसमे आयोजन स्थल पर सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और एक जगह पर 50 लोगों से अधिक लोग जमा नही होने तथा निर्धारित समय में आयोजन समाप्त करने जैसे नियमो का पालन करना अनिवार्य था। वही बैठक में मौजूद लोगों द्वारा आयोजनों के निर्धारित समय बढ़ाने हेतु पूरजोर से मांग रखी गई, किंतु प्रशासनिक अधिकारियों ने शासन की कार्रवाई में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने की बात कह कर उनकी इस मांग को खारिज कर दिया था। यही वजह रही कि इस बार नगर में मात्र दो से तीन स्थानो पर ही गरबा आयोजन हो रहा है। नगर के प्रसिद्ध माताजी मंदिर में होने वाले गरबा आयोजन की रौनक इस बार कम ही देखने को मिल रही है।

वंही अब नगर परिषद राजगढ़ के अधिकारीयो और जन प्रतिनिधियों द्वारा भी इन्ही नियमो का हवाला देते हुए इस बार दशहरा पर्व मेले का आयोजन नहीं करने की बात कही जा रही है। जिस प्रकार से कोरोना गाइडलाइन के आदेशों का पालन कढ़ाई के साथ धार्मिक आयोजन और पर्वों में देखने को मिल रहा है उससे ऐसा लग रहा है कि स्थानीय प्रशासन अपने आपको गौरवान्वित जरूर महशूस कर रहा होगा।

किन्तु वंही इसके विपरीत अगर हम बात करे तो नगर परिषद द्वारा लगने वाले साप्ताहिक पशु बाजार मेले की तो यहां मिली खुली छूट इन्हीं आदेशों के पालन की धज्जियां उड़ा रही है। स्थानीय प्रशासन इस बात को लेकर अबतक आंखे मूंदे बैठा है, जिसकी वजह साफ है कि पशु बाजार से प्रति सप्ताह होने वाली दो से ढाई लाख की आमदनी ..! यही कारण है कि यहां पर प्रति सप्ताह रविवार के दिन हजारों की संख्या में आसपास के ग्रामीण ही नहीं अपितु अंतर प्रांतीय लोग भी यहां पशुओ की खरीदी- बिक्री करने आते हैं। जहां ना तो सोशल डिस्टेंसिंग दिखाई देती है ? और ना ही लोग मास्क पहने होते हैं ? पिछले 3 महीनों से भी अधिक समय से इस प्रकार से पशु मेला का आयोजन नगर परिषद द्वारा निरंतर जारी है।

इस संबंध में कई बार शांति समिति की बैठक में पत्रकारो द्वारा भी स्थानीय प्रशासन को अवगत करवाया गया, किंतु इसके बाउजूद ऐसी लापरवाही पर कार्यवाही नही की गई। जबकि नए नियमों के आदेश में साफ कहा गया है कि मेले की अनुमति कहीं नहीं दी जाएगी…..! अब देखना है की आगे इस संबंध में धार जिले के नवागत कलेक्टर क्या कार्रवाई करते हैं। यह देखने वाली बात होगी ?

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