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Verma's file opened for physical abuse; police prepare list of 50 questions

Verma's file opened for physical abuse; police prepare list of 50 questions

शारीरिक शोषण के आरोपी वर्मा की खुली फाइल, पुलिस ने तैयार की 50 सवालों की लिस्‍ट

IAS संतोष वर्मा पर चल चुका है महिला के शारीरिक शोषण का केस, अब फाइल खुली तो पुलिस ने तैयार की 50 सवालों की लिस्‍ट।

इंदौर। ब्राह्मण बेटियों पर असभ्य टिप्पणी करने वाले विवादित आईएएस अधिकारी व मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ(अजाक्स) के अध्यक्ष संतोष वर्मा पर दर्ज फर्जीवाड़ा केस की फाइल खुल गई है। इस मामले में पुलिस एक न्यायाधीश पर कड़ी कार्रवाई कर सकती है। पुलिस ने हाई कोर्ट की अनुमति के बाद न्यायाधीश से पूछताछ के लिए 50 सवालों की सूची तैयार की है।

दरअसल वर्मा ने कूटरचित न्यायालय आदेश के जरिए आईएएस कैडर में पदोन्नति प्राप्त की थी। उनके खिलाफ एक महिला ने शारीरिक शोषण का मुकदमा दर्ज कराया था। इसी मामले में उन्होंने बरी होने का फर्जी आदेश दिखाकर आईएएस कैडर में पदोन्नति का रास्ता साफ किया था। मामला खुला तो इसमें स्पेशल जज विजेंद्र सिंह रावत की भूमिका भी संदिग्ध मिली। तब उनका तबादला कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।

  • मामला हाई कोर्ट में चल रहा था। चार वर्ष पुराने इस केस में पुलिस अभी तक हाई कोर्ट की अनुमति का इंतजार कर रही थी।
  • एसीपी विनोद दीक्षित ने हाई कोर्ट से मिली अनुमति की पुष्टि करते हुए कहा है कि कोर्ट ने पुलिस के प्रतिवेदन पर विधि अनुसार कार्रवाई की अनुमति दे दी है।
  • न्यायालय का फर्जी आदेश बनाए जाने के मामले में जांच में पता चला था कि मास्टरमाइंड स्वयं न्यायाधीश विजेंद्र सिंह रावत हो सकते हैं जो वर्ष 2021 में जिला कोर्ट में पदस्थ रहे हैं।
  • संदेह के आधार पर हाई कोर्ट ने उनका तबादला कर दिया, लेकिन गिरफ्तारी की अनुमति नहीं दी।
  • उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट के बाद हाल ही में विवादित न्यायाधीश का निलंबन हुआ तो पुलिस की एसआईटी सक्रिय हुई और अग्रिम कार्रवाई की अनुमति मांगी।
  • हाई कोर्ट ने 20 नवंबर को विधि अनुसार कार्रवाई करने की हरी झंडी दे दी।
  • जांच में शामिल एक अफसर के अनुसार न्यायाधीश को नोटिस जारी कर बुलाया जाएगा। गौरतलब है कि वर्मा को भी चार वर्ष पूर्व इसी तरह बुलाकर गिरफ्तार किया था।
  • हार्ड डिस्क रिकवर करवाने में मिले फर्जी फैसले के सबूत पुलिस को जांच की शुरुआत से ही न्यायाधीश पर शक था। पुलिस ने उनकी कोर्ट से कंप्यूटर जब्त किया तो फैसला डिलीट मिला।
  • हार्ड डिस्क जब्त कर फोरेंसिक लैब में जांच करवाई गई। हार्ड डिस्क में दो फैसले मिले, जिसमें एक राजीनामा और दूसरा बरी का बनाया गया था।
  • न्यायाधीश ने खुद को छुट्टी पर बताया था, लेकिन मोबाइल टावर लोकेशन निकालने पर कोर्ट में ही उनकी मौजूदगी मिली। इसके बाद उनके विरुद्ध साक्ष्य एकत्र हो गए।
  • पुलिस को वर्मा की चैटिंग से भी अहम सबूत हाथ लगा है। वर्मा को एक अन्य मजिस्ट्रेट ने न्यायाधीश के पास भेजा था। उसकी वर्मा से लेनदेन संबंधित चैटिंग हो रही थी।

आईएएस एसोसिएशन ने साधी चुप्पी —

इस पूरे मामले में मध्य प्रदेश आईएएस एसोसिएशन मौन है। एसोसिएशन की न तो संतोष वर्मा के बयान को लेकर कोई टिप्पणी आई है और न ही लिखित में विरोध या समर्थन की बात की गई। एसोसिएशन के अध्यक्ष मनु श्रीवास्तव का कहना है कि यह उनका व्यक्तिगत मामला है। शासन की ओर से नोटिस दिया गया है। शासन स्तर पर कार्रवाई प्रक्रियाधीन है, ऐसे में एसोसिएशन का बोलना ठीक नहीं।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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