धार। एक मामूली गलतफहमी ने उस वक्त खतरनाक रूप ले लिया, जब कुछ दबंगों ने बिना सच्चाई जाने एक परिवार पर हमला बोल दिया। घर में घुसकर मारपीट, गाली-गलौज और फिर पिता का अपहरण, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने कुछ ही घंटों में पूरा मामला बदल दिया और सभी आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच गए।
धार जिले के धामनोद थाना क्षेत्र अंतर्गत भोंडल गांव में 24 मार्च की रात एक सनसनीखेज घटना सामने आई। फरियादी सुमेर (22) ने अपने बड़े पापा गोपाल के साथ थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई कि वह मजदूरी कर अपने परिवार, पिता देवीलाल, माता मैनाबाई और पत्नी बबीता का भरण-पोषण करता है।
घटना की रात करीब 8 बजे पुनिया, उसका भाई बन्टी, आकाश, अनिल, सातम और उनके अन्य साथी मोटरसाइकिल व बोलेरो में सवार होकर सुमेर के घर पहुंचे। आते ही उन्होंने गाली-गलौज शुरू कर दी और आरोप लगाया कि सुमेर का भाई लखन उनकी बेटी नंदू को भगाकर ले गया है।
परिवार द्वारा बार-बार इनकार करने के बावजूद आरोपियों का गुस्सा बढ़ता गया और मामला हिंसा में बदल गया। सातम ने बेल्ट से और बन्टी ने लाठी से सुमेर व उसके परिवार के साथ बेरहमी से मारपीट की। इसके बाद आरोपियों ने दबंगई दिखाते हुए सुमेर के पिता देवीलाल को जबरन बोलेरो में बैठाकर अपहरण कर लिया और मौके से फरार हो गए।
2 घंटे में पुलिस का एक्शन —
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई। थाना प्रभारी प्रवीण ठाकरे के निर्देशन में उप निरीक्षक राहुल चौहान ने तत्काल टीम गठित कर कार्रवाई शुरू की। महज 2 घंटे के भीतर पुलिस ने अपहृत देवीलाल को सकुशल बरामद कर लिया।पुलिस ने लगातार दबिश देकर फरार आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया। सातों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
गलतफहमी निकली वारदात की वजह —
पुलिस जांच में सामने आया कि पूरी घटना सिर्फ एक गलतफहमी का नतीजा थी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपहरण, मारपीट, घर में घुसकर हमला सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।
इनका रहा विशेष योगदान —
उप निरीक्षक विजय वास्कले, प्रधान आरक्षक धीरज सिंह जादौन, राम पंवार, मनीष राठौर, रवि सोलंकी, योगेश निगवाल, रवि खन्ना, सुखलाल ने कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


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