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Hanuman Chalisa resonated in Bhojshala, now full worship rights should be granted.

Hanuman Chalisa resonated in Bhojshala, now full worship rights should be granted.

भोजशाला में गूंजा हनुमान चालीसा का स्वर, अब पूरी तरह पूजा का अधिकार मिलना चाहिए

धार। धार की ऐतिहासिक भोजशाला एक बार फिर धार्मिक और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनी, जहां मंगलवार को परंपरागत सत्याग्रह के साथ माहौल भक्तिमय हो उठा। बड़ी संख्या में जुटे हिंदू समाज ने हनुमान चालीसा का पाठ कर अपनी आस्था जताई, वहीं प्रवीण तोगड़िया के बयान ने मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया।

भोजशाला में मंगलवार को परंपरागत सत्याग्रह का आयोजन किया गया। भोज उत्सव समिति के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग शामिल हुए। सुबह से ही परिसर में भक्ति का माहौल बना रहा, जहां श्रद्धालुओं ने हनुमान चालीसा का पाठ और सामूहिक पूजन किया।

सत्याग्रह के बाद प्रवीण तोगड़िया भोजशाला पहुंचे और पूरे परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान भोज उत्सव समिति के गोपाल शर्मा ने उन्हें भोजशाला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति की जानकारी दी।

23 साल पहले खुलवाया था ताला —

मीडिया से चर्चा में तोगड़िया ने कहा कि वे 23 साल पहले यहां ताला खुलवाने के आंदोलन से जुड़े थे, जब एक लाख लोगों की सभा हुई थी। उन्होंने कहा कि वे एक बार फिर सरस्वती माता के दर्शन और आशीर्वाद लेने आए हैं।

जहां मूर्तियां, वहां नमाज कैसे हो सकती —

तोगड़िया ने परिसर में मौजूद संरचनाओं का हवाला देते हुए कहा कि यहां शिवलिंग, कार्तिकेय स्वामी की मूर्ति, शंख और दीवारों पर बने चक्र जैसे प्रमाण मौजूद हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जहां मूर्तियां हैं, वहां नमाज कैसे हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है।

एक दिन भी नमाज की अनुमति न हो —

उन्होंने मांग रखी कि भोजशाला में वाग्देवी की मूल मूर्ति स्थापित कर निर्बाध पूजा की अनुमति दी जाए और वर्ष में एक दिन भी नमाज की अनुमति न हो। तोगड़िया ने यह भी कहा कि अब मुगलकाल समाप्त हो चुका है और वर्तमान सरकारें धर्म की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं, ऐसे में हिंदुओं को पूर्ण पूजा का अधिकार मिलना चाहिए।

भाईचारे के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सद्भाव एकतरफा नहीं हो सकता। साथ ही उन्होंने न्यायालय के आदेशानुसार हुए वैज्ञानिक सर्वे का जिक्र करते हुए कहा कि इससे सच्चाई सामने आएगी और भोजशाला के मूल स्वरूप को लेकर स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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