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Why is the Bhagoria Fair famous? Why is this festival celebrated?

Why is the Bhagoria Fair famous? Why is this festival celebrated?

भगोरिया मेला क्यों प्रसिद्ध है? क्यों मनाया जाता है यह पर्व

धार। ऐसी मान्यता है कि भगोरिया की शुरुआत राजा भोज के समय से हुई थी। उस समय दो भील राजाओं कासूमार औऱ बालून ने अपनी राजधानी भगोर में मेले का आयोजन करना शुरू किया। धीरे-धीरे आस-पास के भील राजाओं ने भी इन्हीं का अनुसरण करना शुरू किया, जिससे हाट और मेलों को भगोरिया कहने का चलन बन गया।

भगोरिया क्या होता है, क्यों कहते है इसे हाट मेला?
भगोरिया एक हाट है जहां हम सब मिलते हैं। व्यापार-व्यवसाय के साथ उल्लास मनाते हैं। यह जीवन और प्रेम का उत्सव है।- जो संगीत, नृत्य और रंगों के साथ मनाया जाता है।
धामनोद के गुजरी में भगोरिया पर्व का उल्लास —
ढोल-मांदल पर थिरके 50 गांवों के ग्रामीण; प्रशासन ने CCTV से रखी कड़ी नजर मेले में 15 से अधिक ढोल-मांदल नृत्य दल शामिल हुए। इस बार विशेष आकर्षण इन दलों के सदस्यों का ‘ड्रेस कोड’ रहा; सभी कलाकार पीले रंग की पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे थे।
पुलिस के पंडाल की थीम महिला सुरक्षा पर आधारित —
थाना प्रभारी धामनोद प्रवीण ठाकरे द्वारा बताया गया की धामनोद थाने के गुजरी ग्राम में भगोरिया की शुरुआत में पुलिस के पंडाल की थींम महिला सुरक्षा पर आधारित रही। पुलिस के पंडाल के सामने देवी अहिल्या रानी, लक्ष्मीबाई, किरण बेदी, स्वर कोकिला लता मंगेशकर, महिला क्रिकेट कप्तान हरमनप्रीत कौर के पोस्टर लगाए गए। भगोरिया में आए हुए सभी युवाओं से महिलाओं का सम्मान करने, नशा न करने, टू व्हीलर ड्राइव करते हुए हेलमेट लगाने और साइबर सुरक्षा की जानकारी दी गई। 
भगोरिया हाट में उपस्थित सभी युवाओं से इस बाबद शपथ ग्रहण कराई गई। सभी लोगों को साइबर सुरक्षा यातायात नियमों का पालन करने एवं नशा मुक्ति के पोस्टर बांटे गए।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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