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Sach Ke Sath

Despite the pretense of suspension and investigation, the illegal hospital continues to operate.

Despite the pretense of suspension and investigation, the illegal hospital continues to operate.

निलंबन व जांच के ढकोसले के बाद भी संचालित होता नियम विरुद्ध चिकित्सालय

जिले संचालित हो रहे नियम विरुद्ध चिकित्सालयों पर नवागत CMHO कस पाएंगे नकेल या चलती रहेगी इनकी दुकान।

धार। शहर के मध्य बीचो-बीच एक चिकित्सालय संचालित हो रहा है, जिस पर कई बार प्रशासनिक गाज गिर चुकी है। बावजूद इसके उक्त चिकित्सालय संचालित करने वाला व्यक्ति कहीं ना कहीं अधिकारियों से जोड़-तोड़ करके फिर अपने चिकित्सालय को संचालित कर लेता है। पूर्व में भी उक्त चिकित्सालय पर गाज गिरने के बाद नाम बदलकर नए चिकित्सालय की अनुमति ले ली गई थी।

अभी अगर हाल ही के ताजा मामले की बात की जाए तो हाल ही में उक्त चिकित्सालय को निलंबित कर दिया गया था। बावजूद इसके उक्त नियम विरुद्ध संचालित चिकित्सालय अपने सेवाए लगातार जारी रखे हुए हैं। आखिरकार इसके पीछे क्या कारण है, देखा जाए तो उक्त चिकित्सा संचालक अधिकारियों को नेता नगरी से जान पहचान का दबाव बनाकर और अधिकारियों को आते ही स्वागत सम्मान करके उनके सामने अपनी छवि बनाकर इस प्रकार के अनैतिक एवं नियम विरुद्ध कार्य लगातार किए जा रहे हैं।

उक्त चिकित्सालय में अगर जांच की जाए तो जिला चिकित्सालय से लगातार मरीजों को प्रलोभन व लालच देकर के यहां पर लाया जाता है। उसके बाद लाखों का बिल उनके हाथ में थमा दिया जाता है। इसमें जिला चिकित्सालय के एक अस्थि रोग विशेषज्ञ का भी बड़ा हाथ है। जिसके कारण यह चिकित्सालय बगैर किसी सुविधाओं के ऑर्थोपेडिक जैसी ओटी को भी संचालित कर रहा है। इतना ही नहीं एक छोटे से छोटे चिकित्सालय को संचालित करने के लिए जितना विद्युत कनेक्शन होना चाहिए उतना विद्युत कनेक्शन भी इस चिकित्सालय पर नहीं है।

मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी भी नहीं कर पाई नियम सम्मत कार्यवाही —

MPEB से भी चिकित्सालय के संचालक मिली भगत करके अपना काम चला रहे हैं। हाल ही के एक छोटे से मामले में देखा गया कि मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी के द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में एक कृषक को उसके घर पर 1लाख 17 हजार का लोड सेटिंग बिल थमाया गया। जबकि उक्त चिकित्सालय पर नियम विरुद्ध एवं कम विद्युत का कनेक्शन पाया जाने पर लोड बढ़ाकर मात्र 29000 रुपए का बिल या यूं कहें कि जुर्माना लगाया गया था। अब मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी इस नियम विरुद्ध संचालित चिकित्सालय पर क्यों मेहरबान है यह तो विद्युत वितरण कंपनी के कर्मचारी ही जाने।

हालांकि इसके पीछे एक बड़ी वजह यह भी हो सकती है कि उन लोगों को इस चिकित्सालय से लाभ शुभ या कहीं न कहीं और कोई सुविधा प्राप्त हो रही होगी।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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