कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के सोशल मीडिया प्रभारी पर पत्रकारों से अभद्रता ओर धक्का मुक्की के आरोप।
भोजशाला पर सवाल पूछते ही मंच छोड़कर रवाना हुए मंत्री।
धार। वीगत दिनों इंदौर में हुए घण्टाकांड की आग अभी ठंडी भी नहीं पड़ी की धार में फिर पत्रकारों के साथ अभद्रता का मामला सामने आया। वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय रविवार को विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन गारंटी योजना (वीबी-जीरामजी) को लेकर जिला भाजपा द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता में शामिल होने एक निजी होटल पहुंचे थे।
पत्रकार वार्ता के दौरान मंत्री के साथ इंदौर से आए उनके सोशल मीडिया प्रभारी लक्ष्मी नामक युवक द्वारा पत्रकारों से अभद्र व्यवहार किए जाने का आरोप सामने आया है।
प्रत्यक्षदर्शी पत्रकारों के अनुसार, पत्रकार वार्ता के दौरान कुर्सियों पर बैठने को लेकर भी सोशल मीडिया प्रभारी लक्ष्मी ने पत्रकारों से अनावश्यक बहस शुरू कर दी, जिससे माहौल असहज हो गया। इसके बाद जब पत्रकार वार्ता समाप्त हुई और पत्रकारों ने आगामी 23 जनवरी, बसंत पंचमी के अवसर पर भोजशाला से जुड़े विषय पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सवाल पूछे, तो मंत्री ने किसी भी प्रश्न का उत्तर दिए बिना मंच छोड़ दिया।
जब पत्रकारों ने माइक आईडी पर मंत्री इंदौर जलकांड पर कांग्रेस की न्याय यात्रा कों लेकर प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया, तब मंत्री के साथ मौजूद सोशल मीडिया प्रभारी लक्ष्मी और सुरक्षाकार्मियों ने कथित तौर पर पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की करते हुए अभद्र व्यवहार किया।
उक्त घटना से पत्रकार वार्ता में मौजूद पत्रकारों में गहरा रोष व्याप्त हो गया। पत्रकार वार्ता के बाद पत्रकारों द्वारा भाजपा का भोजन भी नहीं किया गया और एक निजी होटल में जाकर उन्होंने स्वयं के खर्चे से भोजन ग्रहण किया।
पत्रकारों का कहना है कि जब उन्हें विधिवत पत्रकार वार्ता में आमंत्रित किया जाता है, तो सवाल पूछना उनका संवैधानिक और पेशेवर अधिकार होता है। सवालों से बचना और सहयोगियों द्वारा पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार किया जाना न केवल पत्रकारिता की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को भी ठेस पहुंचाता है।
घटना के संदर्भ में पत्रकारों ने स्पष्ट किया कि वे केवल अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे, इसके बावजूद उनके साथ अपमानजनक भाषा और शारीरिक दुर्व्यवहार किया गया, जिससे वातावरण तनावपूर्ण हो गया।
इस घटना के बाद धार जिले के पत्रकारों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। कई पत्रकार संगठनों ने इसे मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला करार देते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पत्रकार संगठनों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधियों की प्रेस वार्ता में ही मीडिया सुरक्षित नहीं रहेगा, तो यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।
फिलहाल इस पूरे मामले में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय या उनके आधिकारिक प्रतिनिधियों की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है, जबकि प्रशासन ने मामले की जानकारी जुटाने की बात कही है।
पत्रकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में वे उन पत्रकार वार्ताओं का बहिष्कार करेंगे जिनमें नेताओं के सोशल मीडिया हैंडलर मौजूद रहेंगे। साथ ही यह भी कहा गया है कि आगे ऐसी किसी घटना की पुनरावृत्ति होने पर पत्रकार उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

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