धार में प्रशासनिक तैयारियों की पोल खुल गई है। बसंत उत्सव के आयोजन के बीच भोजशाला परिसर में विशालकाय वृक्षों पर लगे ध्वज प्रशासन की नाकामी को उजागर कर रहे हैं। प्रशासन 23 जनवरी को होने वाले बसंत उत्सव की तैयारियों में जुटा है, लेकिन 2016 में हुए पूजा और शुक्रवार की नमाज की तर्ज पर ही इस बार भी तैयारियां जोरों पर है। बसंत पंचमी शुक्रवार को आने से शासन-प्रशासन की नींद उड़ी हुई है।
धार। जहां एक और पुलिस प्रशासन 23 जनवरी को होने वाले बसंत उत्सव को लेकर जोर-सोर से तैयारीयों में जुटा हुआ है, 2016 में हुए बसंत उत्सव एवं शुक्रवार की नमाज की तर्ज पर ही इस बार भी भोजशाला को टिन की चादरों से ढक दिया गया है।
वहीं शुक्रवार के दिन आने वाली बसंत पंचमी ने शासन प्रशासन की नींद उड़ा रखी है।
प्रशासनिक अमला अपनी सभी तैयारियां को लेकर लगातार मैदानी स्तर पर डटे हुए हैं, वहीं भोजशाला परिसर में विशालकाय वृक्षों पर लगे ध्वज प्रशासन की नाकामी को उजागर कर रहे हैं। एक तरफ अखंड पूजा की बात हो रही है तो वहीं परिसर में लगे ध्वज इस बात का जीता जागता प्रमाण है कि जब प्रशासन पेड़ पर लगे ध्वज को नहीं उतर पा रहा है तो हिंदू समाज के लिए अखंड पूजा में किस प्रकार से लोग प्रशासन से सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं।
खेर पूजा या नमाज यह मामला प्रशासन के ऊपर है की किस प्रकार से भोजशाला में मां सरस्वती की निर्विघ्न पूजा संपन्न होगी।

ताजा समाचार (Latest News)
छात्रावास में खराब खाने को लेकर बवाल, 400 छात्र सड़क पर उतरे
लाड़ली बहनों की बल्ले-बल्ले, आज से मिलेंगे ज्यादा रुपए
घंटा मंत्री के धार में भी पत्रकारों से बिगड़े बोल, धक्का मुक्की और अभद्रता