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वन भूमि को निजी कंपनियों को देने का विरोधः 37 लाख हेक्टेयर बंजर भूमि पर 40 साल की लीज से जयस संगठन नाराज।

वंही इंदौर के प्राध्यापकों के समर्थन में भी एक ज्ञापन दिया।

धार। कलेक्ट्रेट में जयस संगठन ने शुक्रवार को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा 37 लाख हेक्टेयर बंजर वन भूमि को निजी निवेशकों को 40 साल की लीज पर देने के फैसले का विरोध जताया। जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) संगठन ने राज्यपाल मंगूभाई पटेल के नाम 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन धार तहसीलदार को सौंपा।

आदिवासी समुदाय के साथ अन्याय लगाया आरोप—

धार जयस संगठन के तहसील अध्यक्ष राज वसुनिया एवम् प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रविराज बघेल, सामाजिक कार्यकर्ता विजय सिंह चोपड़ा ने सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए, इसे तुरंत निरस्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि वन विभाग ने आजादी के बाद से ही अंग्रेजों की विस्तारवादी नीतियों को जारी रखा है। विभाग ने पिछले 75 सालों में जनजातीय समुदाय के साथ अन्याय किया है।

अनिश्चितकालीन आंदोलन और भूख हड़ताल की दी चेतावनी—

कार्यकर्तावो ने आरोप लगाया कि वन विभाग के अधिकारी धृतराष्ट्र की तरह आचरण कर रहे हैं और राज्य हित की अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वनों के निजीकरण का प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया, तो जयस अन्य आदिवासी संगठनों के साथ मिलकर प्रदेश भर में अनिश्चितकालीन आंदोलन और भूख हड़ताल करेगा।

कार्यक्रम में प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रविराज बघेल, राज वसुनिया, विजय सिंह चोपड़ा, राकेश ठाकुर, देव मुकाती, सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे।

इंदौर के प्राध्यापकों के समर्थन में दिया ज्ञापन—

जयस संगठन कार्यकर्ताओं एवम् पदाधिकारियों ने इंदौर के होलकर महाविद्यालय में छात्रों द्वारा किए गए कृत्य के विरोध में एक ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन में बताया गया कि कुछ छात्रों द्वारा महाविद्यालय के प्राध्यापकों को एक कमरे में बंद कर दिया गया था और उनके साथ कई प्रकार से जातति की गई थी। विद्युत सप्लाई तक भी बंद कर दी गई थी। घंटो कमरे में बंद रहने के बाद बड़ी मशक्कत के बाद प्राध्यापकों को बंद कमरे से बाहर निकल गया। इसके विरोध स्वरूप जयस कार्यकर्ताओं ने महामहिम राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन देकर इस प्रकार के कृत्य करने वाले छात्रों पर उचित कार्रवाई करने मांग की गई है।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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