धार। ग्राम पंचायत सचिव अपने आप को समझते हैं मुख्य कार्यपालन अधिकारी से भी बड़ा जब किसी ग्रामीण को आवश्यकता लगती है। तब सचिव फोन उठाना उचित नहीं समझते हैं। इतना ही नहीं जब उनके काले कारनामों के संबंध में पत्रकार इनसे सूचना संकलन के संबंध में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तब इन्हें कई मर्तबा फोन लगाए जाते हैं। यह फोन नहीं उठाते हैं।
ऐसा ही मामला तिरला जनपद पंचायत के सिमलावदा गांव का है। जहां पर ग्राम पंचायत सचिव नारायण पाटीदार ग्रामीणों के फोन तक नहीं उठाते वहां तक भी ठीक है, पर समाचारों के संकलन हेतु पत्रकारों के फोन नहीं उठाने पर भी आमादा हो चुके हैं।
पाटीदार अपने आप को जनपद पंचायत सीईओ ओर जिला कलेक्टर से भी ऊपर समझते हैं।
जबकि तिरला जनपद पंचायत सीईओ अतुल कोठारी किसी भी परिस्थिति में फोन उठा लेते हैं। वहीं बात अगर जिलाधिस महोदय की की जाय तो वह 24 घंटे किसी भी व्यक्ति का फोन उठाते हैं या मैसेज पर जवाब देते हैं पर यहां तो आलम ही निराला है। पंचायत सचिव ठहरे, भ्रष्टाचार में लिफ्ट और भ्रष्टाचार उजागर ना हो इसके लिए पत्रकारों के फोन उठाने से बचते हैं।


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