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Home » मध्यप्रदेश » भोजशाला में जुम्मे की नमाज प्रशासन के लिए चुनौती !
धार। मध्यप्रदेश के धार की ऐतिहासिक भोजशाला में जुम्मे की नमाज को लेकर सोशल मीडिया बयानों के बाद प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बेहद संवेदनशील स्थिति (चुनौती) खड़ी हो गई है। माननीय उच्च न्यायालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के हालिया दिशा-निर्देशों के मद्देनजर, क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना स्थानीय प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है।

 कानून-व्यवस्था बनाए रखने के मुख्य प्रशासनिक कदम —

ऐसे संवेदनशील धार्मिक और कानूनी मामलों में प्रशासन आमतौर पर निम्नलिखित रणनीतियों के तहत काम करता है:
  • सुरक्षा व्यवस्था: भोजशाला परिसर और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल और पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती की गई है।
  • धारा 144: कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका होने से परिसर के आसपास प्रतिबंधात्मक आदेश (धारा 144/सीआपीसी की नई धाराएं) लागू कि गई हैं।
  • शांति समिति की बैठक: प्रशासन हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के धर्मगुरुओं और प्रमुख नागरिकों के साथ बैठक कर शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है।
  • सोशल मीडिया मॉनिटरिंग: भड़काऊ बयानबाजी, अफवाहें या कानून का उल्लंघन करने वाले पोस्ट पर साइबर सेल के जरिए कड़ी नजर रखी जा रही है।

भोजशाला का ऐतिहासिक और कानूनी संदर्भ —

भोजशाला एक ऐतिहासिक स्मारक है जिसे लेकर लंबे समय से कानूनी और धार्मिक दृष्टिकोण सामने आते रहे हैं:
  • पारंपरिक व्यवस्था (2003 के नियम): पूर्व की व्यवस्था के अनुसार, हिंदू समुदाय को प्रत्येक मंगलवार को पूजा करने और मुस्लिम समुदाय को प्रत्येक शुक्रवार को जुम्मे की नमाज अदा करने की अनुमति थी। बसंत पंचमी के दिन हिंदुओं को पूरे दिन पूजा का अधिकार मिलता था।
  • हालिया कानूनी घटनाक्रम: इंदौर उच्च न्यायालय के आदेश पर एएसआई (ASI) द्वारा परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण (Scientific Survey) किया गया था। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट और न्यायालय के अंतिम आदेशों के आधार पर ही अब नई व्यवस्थाएं और सुरक्षा नियम तय किए जा रहे हैं।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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