3 अधिकारी रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, हनुमान जी के चोले में छिपाए थे पैसे, इंदौर लोकायुक्त ने दबोचा।
इंदौर। विशेष पुलिस स्थापना (लोकायुक्त) पुलिस ने मंगलवार को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के तीन अफसरों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। आरोपित अफसरों ने शासकीय ठेकेदार से बिल स्वीकृत करने के बदले लाखों रुपयों की रिश्वत मांगी थी। कार्रवाई पीडब्ल्यूडी कार्यालय (पलासिया) और शासकीय निवास पर हुई है। एसपी (लोकायुक्त) डा. राजेश सहाय के अनुसार सागोर अचाना रोड़ सोहागपुर (पीथमपुर) निवासी राजपालसिंह पंवार द्वारा शिकायत की थी कि अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) टीके जैन, कार्यपालन यंत्री (ईई) जयदेव गौतम और उपयंत्री (सब इंजीनियर) अंशू दुबे द्वारा रुपयों की मांग की गई है।
करोड़ों के बिल पास करने के बदले मांगी रिश्वत —
राजपाल सरकारी ठेकेदार है और उसकी पटेल श्री इंटरप्राइजेस के नाम से फर्म है। साल-2023 में राजपाल ने पेटी कान्ट्रेक्ट पर मेथवाड़ा फोरलेन पहुंच मार्ग का 4 करोड़ 73 लाख 35 हजार रुपये में ठेका लिया था। उसने 5 करोड़ 51 लाख 72 हजार रुपये में कार्य पूर्ण कर बिल प्रस्तुत कर दिए थे। राजपाल ने कमिशन देकर भुगतान ले लिया लेकिन 30 लाख से ज्यादा की राशि अफसरों ने रोक ली।
आरोपित जयदेव ने डेढ़ लाख और टीके जैन व अंशू दुबे ने एक-एक लाख रुपये की मांग की। रिश्वत न देने पर करीब दो महीने से अफसरों ने राजपाल के बिल रोक लिए। उसने लोकायुक्त अफसरों से संपर्क कर आरोपितों की आवाज रिकार्ड कर ली। मंगलवार को रिश्वत के रुपये देने की डील हुई और राजपाल के साथ लोकायुक्त की टीम भी पीडब्ल्यूडी कार्यालय जा पहुंची।
हनुमान जी के चोले में छिपाए रुपये —
लोकायुक्त पुलिस सुबह ही पलासिया स्थित पीडब्ल्यूडी कार्यालय में डेरा डाल चुकी थी। एसडीओ टीके जैन और एसई अंशु दुबे आफिस में बैठे हुए थे। निरीक्षक आशुतोष मिठास बाहर खड़े हुए थे। एसई अंशू ने 50 हजार रुपये कम होने से रिश्वत की राशि गुस्से में लौटा दी। राजपाल के कर्मचारी ने जैसे ही इशारा किया, टीम ने दोनों को पकड़ लिया। दूसरी टीम को ईई जयदेव गौतम के शासकीय निवास (पलासिया) भेजा गया था।
ईई ने राजपाल को रुपये लेकर बुला लिया। उसने रुपये हनुमानजी के चोले में छुपा लिए थे। निरीक्षक प्रतिभा तोमर ने आरोपित को घर से पकड़ लिया। लोकायुक्त को देखते ही ईई रोने लगा। उसने कहा कि मैंने राजपाल को बच्चे की तरह प्रश्रय दिया था। टीम तीनों को गिरफ्तार कर कार्यालय लेकर आ गई। तीनों से करीब ढाई लाख रुपये जब्त हुए हैं।
टीप लिखने से लेकर फाइल बढ़ाने तक का रेट तय —
राजपाल ने बताया पीडब्ल्यूडी में हर काम के रेट तय हैं। ठेकेदार अफसरों को कमिशन देकर ही बिल स्वीकृत करवाते हैं। टीप लिखने, फाइल आगे बढाने और सत्यापन का कमिशन तय है। जयदेव ने 15 प्रतिशत और टीके जैन व अंशू दुबे ने दो-दो प्रतिशत कमिशन की मांग की थी।



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