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दबंगई: 3 बीघा खेत जेसीबी से छलनी, विरोध करने पर मौत की धमकी; 20 दिन बाद भी सोया प्रशासन

सरकारी तालाब के ‘गहरीकरण’ की आड़ में आदिवासी की जमीन पर डकैती!

धार। जिले के ग्राम धामंदा में विकास के नाम पर विनाश का खेल चल रहा है। यहाँ एक आदिवासी किसान की पुश्तैनी जमीन पर ‘खनन माफिया’ ने गिद्ध जैसी नजरें गड़ा दी हैं। शासकीय तालाब के गहरीकरण के नाम पर कागजों में 52 बीघा का खेल दिखाया जा रहा है, लेकिन हकीकत में जेसीबी की गूंज सिर्फ भेरूलाल के उपजाऊ खेत में सुनाई दे रही है।

मामला क्या है? 

पीड़ित किसान भेरूलाल (32) ने बताया कि गांव के ही दबंग कृष्णा पाटीदार और पवन पाटीदार ने उसकी जमीन पर अवैध कब्जा करने की नीयत से जेसीबी उतार दी है। दिन-रात डंपरों से काली मिट्टी का अवैध व्यापार किया जा रहा है।

  • नुकसान: करीब 3 बीघा कृषि भूमि गहरी खुदाई के कारण बर्बाद हो चुकी है।

  • धमकी: जब किसान ने अपनी आजीविका बचाने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी और बोरिंग-मोटर नहीं चलने देने का दबाव बनाया।

पीड़ित की जुबानी: ‘साहब, क्या गरीब की जमीन का कोई मोल नहीं?’

“यह जमीन मेरी पीढ़ियों की विरासत है। गहरीकरण करना है तो उस क्षेत्र में करें जहाँ पानी नहीं भरता, मेरी उपजाऊ फसल को क्यों उजाड़ रहे हैं? मैंने कलेक्टर और एसपी साहब को लिखित शिकायत दी है, लेकिन अब तक कोई मुझे बचाने नहीं आया। मुझे डर है कि ये लोग मेरी जान ले लेंगे।” — भेरूलाल, पीड़ित किसान।

प्रशासन से तीखे सवाल?

  1. कलेक्टर साहब: जब 13 अप्रैल को शिकायत मिल गई थी, तो 20 दिनों तक विभाग ने मौका मुआयना क्यों नहीं किया?

  2. खनन विभाग: काली मिट्टी के इस खुले व्यापार पर रॉयल्टी का हिसाब है या सब ‘अंधेर नगरी’ चल रहा है?

  3. पुलिस प्रशासन: एक आदिवासी किसान को जान से मारने की धमकी मिल रही है, क्या किसी बड़ी वारदात का इंतजार किया जा रहा है?

धार जिले का यह मामला केवल एक किसान की जमीन का नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता का है। यदि समय रहते इन ‘जेसीबी’ को नहीं रोका गया, तो एक गरीब परिवार की आजीविका हमेशा के लिए मिट्टी में मिल जाएगी।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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