जब तक तमाशा न करो, सुनवाई नहीं होती, रतलाम में घोड़ी पर सवार होकर अनोखे अंदाज में कलेक्ट्रेट पहुंचा फरियादी।
रतलाम। मंगलवार दोपहर कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान उस समय अनोखा दृश्य देखने को मिला, जब शिवपुर निवासी अरुण शर्मा करीब 15 किलोमीटर दूर से घोड़ी पर सवार होकर अपनी शिकायत लेकर पहुंचे।
अरुण शर्मा ने गोचर (चारागाह) भूमि एवं गांव के कांकड़ से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर से मुलाकात नहीं हो पाने पर उन्होंने डिप्टी कलेक्टर संजय शर्मा को अपना आवेदन दिया।
बिना तमाशा किए कोई नहीं सुनता बात —
आवेदन सौंपने के बाद वे वापस घोड़ी पर सवार होकर लौट गए। घोड़ी पर आने के सवाल पर शर्मा ने जवाब दिया कि आजकल हर किसी को तमाशा देखने का शौक है। बिना तमाशा किए कोई आपकी बात नहीं सुनेगा। इसलिए इस अंदाज में उन्हें आना पड़ा जिससे सबका ध्यान समस्या पर लाया जा सके।
चारागाह भूमि पर अतिक्रमण से पशुओं का संकट —
आवेदन में अरुण शर्मा ने बताया कि जिले के अधिकांश गांवों में पशु-पक्षियों और जीव-जंतुओं के लिए निर्धारित सरकारी चारागाह भूमि पर लोगों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है। इसके चलते पशुओं के रहने की जगह समाप्त होती जा रही है और किसानों के लिए भी यह समस्या बनती जा रही है।
वर्तमान हालात में पशुओं को कहीं ठहरने की जगह नहीं बची है। जानवरों की स्थिति ऐसी हो गई है कि वे जाएं तो कहां जाएं, रहें तो कहां रहें। कोई इधर से भगाता है तो कोई उधर से, उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए लिखा।
जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर खतरा —
आधे से अधिक पशु समाप्त हो चुके हैं और यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में जीव-जंतुओं का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा। शर्मा ने चेतावनी देते हुए लिखा कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो इसका दुष्परिणाम मानव समाज को भी भुगतना पड़ेगा।
ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने मांग की है कि जिले की समस्त चारागाह एवं कांकड़ भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए, ताकि पशुओं को सुरक्षित वातावरण मिल सके।


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