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Private hospitals are openly flouting government rules

Private hospitals are openly flouting government rules

निजी चिकित्सालय खुलेआम उड़ा रहे शासकीय नियमों की धज्जियां

धार। जिले में कोरोना के बाद निजी चिकित्सालयो की बाढ़ सी आ गई, हर गली मोहल्ले में एक निजी चिकित्सालय संचालित हो रहा है।

सबसे बड़ी बात यह है कि यह निजी चिकित्सालय शासकीय नियमों की खुलेआम उड़ा रहे हैं धज्जियां। निजी चिकित्सालय द्वारा दस्तावेजी खेल या यूं कहे की शुभ-लाभ के चलते और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के सहयोग से खूब फल-फूल रहा स्वास्थ्य सेवाओं का खेल।

विगत दो से तीन वर्षों में जिले में सैकड़ो निजी चिकित्सालय निर्मित हो गए। बात अगर धार शहर की की जाए तो यहां पर भी कई निजी चिकित्सालय संचालित हो रहे हैं। इन निजी चिकित्सालय में जो दस्तावेज में बताया गया है वह मौके पर उपलब्ध ही नहीं है। बताया कुछ और गया है हकीकत में कुछ और है, इतना ही नहीं जिन डॉक्टरों का नाम चिकित्सालयों ने अपने अनुबंध या यूं कहे की चिकित्सालय की अनुमति के लिए दिए हैं, वह डॉक्टर उन चिकित्सालय में कभी गए ही नहीं या जाते ही नहीं है।

ऐसे में एक बड़ा खेल चल रहा है जो कहीं ना कहीं आम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और अनदेखी का आलम यह है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा संचालित आयुष्मान भारत योजना को भी यह निजी चिकित्सालय पलीता लगाने से पीछे नहीं है। कई चिकित्सालय में इस योजना को लेकर कई बड़े मामले निपटाए जा रहे हैं। जबकि सही मायने में देखा जाए तो निजी चिकित्सालय्यों के पास पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएं नहीं है, ना ही पर्याप्त ड्यूटी डॉक्टर हैं।

आपको बता दे की नियमानुसार हर चिकित्सालय में एमबीबीएस एमडी पैथोलॉजिस्ट होना जरूरी होता है, वहीं मेडिकल स्टोर पर भी फार्मासिस्ट का नियम होता है। ऐसे में जिले में स्वास्थ्य सेवावों के हाल आने वाले समय में क्या होंगे यह तो काल के गाल में समाया हुआ है।

कोरोना काल के दौरान अच्छे-अच्छे बड़े-बड़े चिकित्सकों ने अपने चिकित्सालय बंद कर दिए थे और घर में दूबक कर बैठ गए थे, वही आज पैसा छाप रहे हैं। यह लोग कोरोना काल में अपनी सेवाए क्यों नहीं दे पाए, कोरोना काल के दौरान कोरोना महामारी के ऐसे विकटतम दौर में यह लोग अपनी स्वास्थ्य सेवाओं को भूलकर सिर्फ अपनी जान बचाने में लगे हुए थे, तो इन लोगों को चिकित्सालयो की अनुमति देना या इन लोगों को चिकित्सा सेवा संचालित करने की अनुमति देना कहीं ना कहीं आम लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है।

अगली खबर में हम विस्तृत रूप से सूचना के अधिकार अधिनियम से प्राप्त जानकारी के अनुसार खबर प्रकाशित करेंगे।

सटीक एवं निष्पक्ष खबरों के लिए पड़ते रहिए मध्य भारत लाइव सच के साथ।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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