कोतवाली पुलिस ने दर्ज किया बीएनएस की धाराओं में केस, त्रिमुर्ति नगर के सौदे में हुआ खेल।
धार। शहर के त्रिमुर्ति नगर में एक मकान खरीदने का सपना उस वक्त कड़वी याद में बदल गया, जब सौदे के बीच आए एक बिचौलिए ने लाखों रुपयों पर हाथ साफ कर दिया। पुलिस ने करीब डेढ साल पुराने मामले में अब धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया है। आरोपी ने न केवल खरीदार का भरोसा तोड़ा, बल्कि मालिक द्वारा लौटाई गई 11 लाख रुपए की बयाना राशि भी हड़प ली।
क्या है पूरा मामला? —
हटवाड़ा निवासी जगदीश कांकरवाल ने त्रिमुर्ति नगर स्थित साधना पगाड़े के मकान (नंबर 304) को खरीदने का मन बनाया था। 19 सितंबर 2024 को यह सौदा 80 लाख रुपए में तय हुआ। सौदे को पक्का करने के लिए जगदीश ने 11 लाख रुपए नगद बतौर बयाना राशि (एडवांस) साधना पगाड़े को दिए और अनुबंध (एग्रीमेंट) कर लिया।
ऐसे शुरू हुआ धोखाधड़ी का ‘साइड गेम —
अनुबंध के अनुसार, तय समय में मकान की रजिस्ट्री नहीं हो पाई। इस पर मकान मालिक साधना पगाड़े ने ईमानदारी दिखाते हुए बयाना राशि के 11 लाख रुपए वापस करने का निर्णय लिया। उन्होंने यह बड़ी रकम सौदे में मध्यस्थता (दलाली) कर रहे मनीष पिता मनोहरलाल राठौर (निवासी 16 जवाहर मार्ग, धार) को सौंपी, ताकि वह यह पैसा खरीदार जगदीश तक पहुँचा दे।
“भरोसा ही सबसे बड़ा हथियार बना। मनीष ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर मिलीभगत की और वह रकम असली हकदार तक पहुँचाने के बजाय खुद डकार गया।”
पुलिस की कार्रवाई: 318(4) के तहत केस —
लंबी जद्दोजहद के बाद, पुलिस ने मंगलवार रात (21 अप्रैल 2026) को आरोपी मनीष राठौर और उसके अन्य साथियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
थाना: कोतवाली, धार
धाराएं: 318(4) [धोखाधड़ी], 3(5) भारतीय न्याय संहिता (BNS)
आरोपी: मनीष राठौर एवं अन्य साथी
प्रॉपर्टी के सौदों में अक्सर ‘मिडल मैन’ या बिचौलिए पर आंख मूंदकर भरोसा करना भारी पड़ता है। बड़ी रकम का लेनदेन हमेशा बैंक ट्रांजेक्शन या सीधे पक्षकारों के बीच लिखित गवाहों की मौजूदगी में ही करना सुरक्षित है। फिलहाल, पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश और रुपयों की रिकवरी के प्रयास में जुटी है।



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