धार। शासकीय सांदीपनि विद्यालय के खिलाफ पिछले कुछ दिनों से चल रहे झूठे आरोपों के विरोध में सोमवार को विद्यालय की शिक्षिकाएं शिक्षक बड़ी संख्या में सहायक आयुक्त कार्यालय पहुंचे। आक्रोशित शिक्षिकाओं शिक्षकों ने सहायक आयुक्त नरोत्तम बरखड़े ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट कहा कि विद्यालय एवं प्राचार्य डॉ स्मृति रत्न मिश्र की छवि को जानबूझकर धूमिल करने के लिए सुनियोजित षड्यंत्र रचा जा रहा है।
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग व्यक्तिगत द्वेष और स्वार्थवश केसूर और तोरनोद की बाहरी शिक्षिकाओं को आगे कर झूठी शिकायतें करवा रहे हैं और उन्हें समाचार माध्यमों में उछालकर भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। जबकि जिन शिकायतों को बार-बार उठाया जा रहा है, उनकी जांच 10 से 12 वर्ष पूर्व ही विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा चुकी है और सभी आरोप निराधार सिद्ध हो चुके हैं। तत्कालीन समय में केसूर और तोरनोद में पदस्थ शिक्षिकाए भी केसूर और तोरनोद की शिकायतकर्ता शिक्षिकाओं की हकीकत बताने के लिए अधिकारियों के पास पहुंची थी।
शिक्षिकाओ ने सारे जांच प्रतिवेदन और निलंबन आदेश भी अधिकारियों को सौंपे हैं। उन्होंने सहायक आयुक्त को बताया कि इन सभी शिकायतकर्ता शिक्षिकाओं को नकल करवाते हुए पकड़ा गया था और कार्रवाई प्रस्तावित हुई थी जिससे इन्होंने 10 वर्ष पूर्व शिकायतें की थी और उन सब की जांच उस समय हो चुकी थी। जांच में सारी शिकायते निराधार और गलत पाई गई थी। तोरनोद की शिक्षिकाओं और शिक्षकों ने बताया कि चार वर्ष पूर्व तोरनोद की शिकायतकर्ता शिक्षिका की लिखित शिकायत वहीं के एक शिक्षक को लेकर विद्यार्थियों और शिक्षकों ने की थी।
जांच में शिकायतकर्ता शिक्षिका और शिक्षक दोनों को निलंबित कर दिया गया था। इस पर उस शिक्षक के इशारे पर शिक्षिका ने प्राचार्य पर ही आरोप जड़ दिए थे। आरोपों की जांच में प्राचार्य निर्दोष पाए गए थे।
विभागीय जांच का नोटिस मिला तो लगा दिए आरोप —
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि 8 अप्रैल को एक शिक्षिका मेघना शर्मा को जांच का नोटिस मिलने के बाद, 9 अप्रैल को साइकिल वितरण कार्यक्रम के दौरान विधायक के समक्ष रोते हुए प्रताड़ना के झूठे आरोप लगाए गए। इसके अगले ही दिन बाहरी विद्यालयों की शिक्षिकाओं को साथ लेकर पुनः आरोपों को दोहराया गया, जो पूरी तरह पूर्व नियोजित है। विद्यालय एक श्रेष्ठ विद्यालय के रूप में स्थापित होकर अपनी अलग पहचान बना चुका है।
शिक्षिकाओं शिक्षकों का कहना है कि वर्षों पुराने मामले जिनकी जांच हो चुकी है उनको फिर से दोहराकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को गुमराह किया जा रहा है। सहायक आयुक्त ने उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया है।


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