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15 से 20 सीटों पर बागियों ने बिगाड़े समीकरण, मुकाबला बराबरी का!

प्रदेश में कांग्रेस-भाजपा के बीच कांटे की टक्कर, मुकाबला बराबरी का!

लगभग 15 से 20 सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के बागियों ने बिगाड़े समीकरण।

बगावत वाली सीटें ही सरकार बनाने में इनकी हो सकती हैं निर्णायक भूमिका।

धार/भोपाल। (राकेश साहू) मध्य प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनावों में भाजपा-कांग्रेस के बीच ही चुनावी मुकाबला कांटे का चल रहा है। 2023 के चुनावों में वर्ष 2018 के परिणाम ही दोहराने जैसी स्थिति बन रही हैं। लगभग मुकाबला बराबरी का ही दिखाई दे रहा है। हर दूसरे दिन एक सर्वे रिपोर्ट आ रही है, जिसमें कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस की सरकार बनती दिख रही है।

सट्टा बाजार में भी दोनों पार्टियों के भाव शेयर मार्केट की तरह उतार-चढ़ाव पर हैं। ऐसे में सभी की नजर खामोश मतदाताओं की ओर है। प्रदेश में जहां बगावत हो रही है वहां त्रिकोणीय, चतुष्कोणीय संघर्ष वाली सीटों ने इस चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुमान भी पल पल में बदल रहे हैं। इस विधानसभा चुनावों में किसी भी प्रकार की कोई लहर नहीं है। यह चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ा जा रहा है और सत्ता के समीकरण बार बार बदलने से अफवाहों का बाजार गर्म है।

प्रदेश में 15 से 20 सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के बागियों ने ही चुनौती पेश की है। इन 20- 22 सीटों पर चुनावी संघर्ष ऐसे संकेत दे रहा है कि बसपा, सपा और आम आदमी पार्टी, निर्दलीय प्रत्याशी भी प्रमुख दलों को नुकसान पहुंचाएंगे। ये बगावत वाली सभी सीटें बहुमत का जादुई आंकड़ा जुटाने में भी निर्णायक भूमिका निभायेगी।

आपको बता दें कि होशंगाबाद विधानसभा क्षेत्र में भाजपा ने डॉ. सीतासरन शर्मा तो कांग्रेस ने उनके बड़े भाई गिरिजाशंकर शर्मा को मैदान में उतारा है। वहीं भाजपा के असंतुष्ट कार्यकर्ता भगवती चौरे भी चुनावी मैदान है।

वहीं गुना जिले की चाचौड़ा सीट पर भी त्रिकोणीय मुकाबला है। यहां भाजपा से प्रियंका मीना को टिकट देने के बाद ममता मीना नाराज हो गईं। वह आप की टिकट पर मैदान में उतर गई हैं। कांग्रेस से विधायक लक्ष्मण सिंह फिर मैदान में हैं।

मालवांचल इंदौर जिले की महू विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की ओर से मंत्री ऊषा ठाकुर उम्मीदवार हैं तो कांग्रेस से रामकिशोर शुक्ला। कांग्रेस के पूर्व विधायक अंतर सिंह दरबार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ रहे हैं।

बुरहानपुर विधानसभा क्षेत्र में पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस को टिकट मिलने के कारण पूर्व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष स्व श्री नंदकुमार सिंह चौहान के पुत्र हर्षवर्धन सिंह चौहान ने नाराज होकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में है। कांग्रेस ने विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा को प्रत्याशी बनाया है।

धार विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के बागी मैदान में हैं। दोनों बागियों को टिकिट नहीं मिलने के कारण परिवारवाद, वंशवाद का आरोप लगाते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव यादव चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने विधायक श्रीमती नीना विक्रम वर्मा पर ही भरोसा जताया है। कांग्रेस ने श्रीमती प्रभा बालमुकुंद सिंह गौतम को उम्मीदवार बनाया है, जिससे नाराज होकर प्रदेश महामंत्री कुलदीप सिंह बुंदेला निर्दलीय खड़े हैं।

उज्जैन जिले के बड़नगर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने राजेंद्र सिंह सोलंकी का टिकट बदलकर विधायक मुरली मोरवाल को प्रत्याशी बनाया तो नाराज सोलंकी निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए।
जिसे टिकिट नहीं मिला तो वह निर्दलीय प्रत्याशी बनकर चुनाव मैदान में कूद गया। जीत नही सकते तो हराने का काम ही करके खुश नजर आ रहे हैं।

विंध्य विंध्य अंचल की सीधी सीट से विधायक केदारनाथ शुक्ला का भाजपा से टिकट कट जाने के कारण वह निर्दलीय मैदान में हैं। वह भाजपा की प्रत्याशी रीति पाठक और कांग्रेस के ज्ञान सिंह को चुनौती दे रहे हैं।

चुरहट सीट पर भी पूर्व सांसद गोविंद सिंह के पुत्र अनेंद्र मिश्र राजन ने मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। यहां कांग्रेस से पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह उम्मीदवार हैं।

मैहर में भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी का टिकट कटने के बाद वे अपनी विंध्य जनता पार्टी से कांग्रेस-भाजपा प्रत्याशियों को टक्कर दे रहे हैं।

मंडला की बिछिया सीट पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से कमलेश टेकाम भाजपा के डॉ. विजय आनंद मरावी और कांग्रेस से नारायण सिंह पट्टा के सामने चुनौती पेश कर रहे हैं।

डिंडौरी सीट पर जिला पंचायत अध्यक्ष और पूर्व कांग्रेस नेता रुद्रेश परस्ते ने निर्दलीय मैदान में उतरकर मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है।

शहडोल संभाग की जयसिंहनगर, जैतपुर और कोतमा सीटों पर भी त्रिकोणीय मुकाबला है।

सबसे ज्यादा विरोध ग्वालियर चंबल संभाग में देखने को मिल रहा है और यहां बागी सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।

ग्वालियर-चंबल ग्वालियर-चंबल अंचल में भिंड जिले की लहार विधानसभा सीट से भाजपा के बागी रसाल सिंह बसपा, अटेर से मुन्ना सिंह भदौरिया सपा, भिंड विधानसभा सीट से संजीव सिंह कुशवाह बसपा और मुरैना विधानसभा सीट से भाजपा के बागी राकेश रुस्तम सिंह बसपा से चुनाव मैदान में हैं।

वहीं, सुमावली से कांग्रेस के बागी कुलदीप सिकरवार और दिमनी से बलवीर डंडोतिया बसपा के टिकट पर मैदान में डटे हैं।

शिवपुरी के पोहरी से कांग्रेस के बागी प्रद्युमन वर्मा बसपा से चुनाव लड़ रहे हैं। यह संभाग सरकार को बनाने में निर्णायक भूमिका निभा रहा है।

बुंदेलखंड के जतारा में कांग्रेस से बागी धर्मेंद्र अहिरवार बसपा, सागर जिले के बंडा विधानसभा में भाजपा से बगावत कर सुधीर यादव ने आप से उतरकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।

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