पूर्व मुख्यमंत्री का दावा !!!
टेक्स कम करने से ना सिर्फ़ जनता को फ़ायदा होगा बल्कि सरकार को भी नुकसान नहीं होगा।
मध्यप्रदेश में टेक्स का ढांचा —
- पेट्रोल पर टैक्स: 29% वैट (VAT) + ₹2.50 प्रति लीटर अतिरिक्त कर + 1% उपकर (Cess)।
- डीजल पर टैक्स: 19% वैट (VAT) + ₹1.50 प्रति लीटर अतिरिक्त कर + 1% उपकर (Cess)।
- कुल राज्य कर: पेट्रोल पर ₹30 से अधिक और डीजल पर ₹20 से अधिक प्रति लीटर केवल राज्य सरकार के टैक्स के रूप में वसूला जाता है।
पड़ोसी राज्यों से तुलना और राजस्व पर असर
- कीमतों में अंतर: उत्तर प्रदेश की तुलना में मध्य प्रदेश में पेट्रोल औसतन ₹13 और डीजल ₹4 प्रति लीटर तक महंगा है।
- राजस्व का नुकसान: सीमावर्ती जिलों के नागरिक और भारी वाहन (जैसे ट्रक) मध्य प्रदेश के बजाय पड़ोसी राज्यों से ईंधन भरवाना पसंद करते हैं, जिससे राज्य के राजस्व को नुकसान हो रहा है।
ईंधन की कीमतें कम करने के उपाय
- टैक्स में कटौती: राज्य सरकार वैट या अतिरिक्त उपकर को कम करके उपभोक्ताओं को सीधे राहत दे सकती है।
- GST के दायरे में लाना: यदि पेट्रोल और डीजल को माल और सेवा कर (GST) के अंतर्गत लाया जाए, तो पूरे देश में टैक्स ढांचा समान हो जाएगा और कीमतें काफी नीचे आ सकती हैं।
पेट्रोल और डीजल पर टैक्स में कमी कर 10 रुपए प्रति लीटर की राहत दे राज्य सरकार —
जानकारी देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने माँग की है कि मध्य प्रदेश सरकार तत्काल इस टैक्स में कटौती करे ताकि मध्य प्रदेश की जनता को सबसे महँगा डीजल और पेट्रोल नहीं ख़रीदना पड़े। मध्य प्रदेश सरकार तत्काल डीजल और पेट्रोल की कीमतों में 10 रुपए प्रति लीटर की कमी करे।
उन्होंने कहा कि टैक्स कम करने से ना सिर्फ़ जनता को फ़ायदा होगा बल्कि सरकार को भी नुकसान नहीं होगा।
डीजल महँगा होने की वजह से ट्रक और अन्य भारी वाहन प्रदेश की तुलना में अन्य राज्यों से तेल भरवाना बेहतर समझ रहे हैं। इसके अलावा सीमावर्ती जिला के लोग अन्य प्रदेश से ईंधन ले रहे हैं। इससे मध्य प्रदेश को राजस्व नुकसान हो रहा है।

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