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Why are officials trying to protect the fraudulent Nanandkheda Gram Panchayat?

Why are officials trying to protect the fraudulent Nanandkheda Gram Panchayat?

नानन्दखेड़ा ग्राम पंचायत के फर्जीवाड़े को बचाने में क्यों लगे अधिकारी

धार। ग्राम पंचायत नानंदखेड़ा जनपद तिरला में विकास कार्यों के नाम पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं (गबन) के कई मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जहाँ सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।
हाल ही में नईदुनिया अख़बार और मध्यभारत लाइव न्यूज़ के द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार की पोल खोलने वाली कई खबरें लगातार प्रकाशित की जा रही हैं।
📢 ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार के मुख्य तरीके (पर्दाफाश)
    • कागजों पर निर्माण कार्य: ग्रामीणों का आरोप हे की नानंदखेड़ा गाँव में सड़कों, नालियों और अमृत सरोवर का निर्माण केवल सरकारी फाइलों और कागजों में दिखा दिया गया है, जबकि धरातल पर कई काम नहीं हुए है।
    • फर्जी मस्टर रोल और भुगतान: मनरेगा (MGNREGA) योजना में मजदूरों के नाम पर फर्जी हाजिरी लगाकर या अपने रिश्तेदारों के बैंक खातों में बिना काम किए ही मजदूरी की राशि ट्रांसफर कर निकाल ली जाती है। नियम विरुद्ध मशीनों से कार्य करवाया जाता है जो की गलत है।
    • घटिया निर्माण सामग्री: सीसी रोड (CC Road) या पंचायत भवन के निर्माण में तय मानकों की अनदेखी कर बेहद घटिया स्तर की सामग्री का उपयोग किया जाता है, जिससे बनी हुई इमारतें या सड़कें कुछ ही महीनों में टूट जाती हैं।
    • फर्जी बिल और अमानक खर्च: ग्राम पंचायतों में साफ-सफाई या हैंडपंप मरम्मत जैसी छोटी चीजों के नाम पर लाखों रुपये के फर्जी बिल लगाकर भारी राशि का गमन (घोटाला) किया जाता है। पंचायत दर्पण पर कारनामे छुपाने के लिए धुंदले बिल अपलोड किए जाते है।

भ्रस्टचार को दबाने के लिए 181 शिकायत पर भी मनचाहे जवाब —
Why are officials trying to protect the fraudulent Nanandkheda Gram Panchayat?
Why are officials trying to protect the fraudulent Nanandkheda Gram Panchayat?
सीएम हेल्पलाइन शिकायत पर भी मनचाहे जवाब डालकर शिकायत बंद करवाने का प्रयास किया जाता है, हाल ही में तिरला जनपद पंचायत द्वारा ग्राम पंचायत नानंदखेड़ा में की गई शिकायत के ऊपर हास्यपद जवाब डाला गया। उक्त जवाब में दर्शाया गया कि पंचायत सचिव के द्वारा पंचायत दर्पण पर अपलोड किए गए बिल को ओरिजिनल बिल से मिलान किया गया, भुगतान सही पाए जाने पर भ्रष्टाचार नहीं होना दिखाया गया। जबकि पंचायत दर्पण पर कई कोरे कागज अपलोड किए गए अब यह तो भगवान ही जाने की जांच दल ने उन कोरे कागजों का किन बिलों से मिलान किया होगा। और GST का तो नाम ही नहीं लेना चाहिए, क्योकि मामला भ्रस्टाचार का जो ठहरा। 
इससे साफ जाहिर होता है कि अधिकारियों की भी मिली भगत पंचायत में हो रहे भ्रष्टाचार में शामिल है ??

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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