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गोदामों में भरा है खाद, फिर भी दर-बदर भटक रहे किसान: रबी सीजन से पहले ‘ऑनलाइन पोर्टल’ बना आफत

जिले में रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही खाद की किल्लत और प्रशासनिक लापरवाही की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

धार। (कमलगिरी गोस्वामी) मध्य प्रदेश सरकार भले ही सूबे में किसानों के कल्याण के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी जस की तस बनी हुई है। जिला मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित ग्राम देदला सहित पूरे धार जिले में रबी की फसल की बुवाई को लेकर किसानों ने अपनी जमीन तो तैयार कर ली है, लेकिन बोनी से पहले खेतों में डाला जाने वाला आवश्यक उर्वरक (खाद) पाने के लिए वे दर-बदर भटकने को मजबूर हैं। आरोप है कि कृषि विभाग और सहकारिता विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की ‘कुंभकरणी नींद’ के कारण अन्नदाता इस महत्वपूर्ण सीजन में परेशान हो रहा है।

डिजिटल इंडिया का ‘पोर्टल’ बना परेशानी का सबब —

किसानों की सहूलियत और पारदर्शिता के लिए शासन द्वारा शुरू किया गया खाद वितरण पोर्टल अब उनके लिए सिरदर्द साबित हो रहा है। देदला ग्राम के पीड़ित कृषक मुरली रघुवंशी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया, “हम पिछले कई दिनों से सारे कामकाज छोड़कर पोर्टल पर उर्वरक प्राप्त करने के लिए माथापच्ची कर रहे हैं। घंटों प्रयास करने के बाद भी पोर्टल पर स्टॉक ही नहीं चढ़ाया जा रहा है।”
पोर्टल पर न तो खाद की उपलब्धता दर्शाई जा रही है और न ही इसके माध्यम से किसी किसान को खाद आवंटित हो पा रही है। स्थिति यह है कि ऑनलाइन व्यवस्था के चक्कर में किसानों का कीमती समय केवल कंप्यूटर और मोबाइल की स्क्रीन पर सर्वर डाउन की समस्या देखने में बर्बाद हो रहा है।

गोदामों में खाद फुल, वितरण व्यवस्था ‘गुल’—-

इस पूरी समस्या में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि समिति के गोदामों में पर्याप्त मात्रा में खाद और उर्वरक भरा हुआ रखा है। भौतिक रूप से स्टॉक मौजूद होने के बावजूद ऑनलाइन पोर्टल अपडेट न होने के कारण अधिकारी और कर्मचारी किसानों को खाद देने से साफ मना कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि यह सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और अधिकारियों के बीच आपसी समन्वय की कमी का नतीजा है, जिसकी सजा खेतों में पसीना बहाने वाले किसान को भुगतनी पड़ रही है।

समय पर बोनी न होने से मंडराया आर्थिक संकट —

मालवा क्षेत्र के धार जिले में रबी सीजन के दौरान गेहूं और चने की बुवाई मुख्य रूप से की जाती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बोनी के समय खाद (विशेषकर डीएपी और यूरिया) का सही समय पर मिलना फसल के अच्छे उत्पादन के लिए बेहद जरूरी है। यदि बुवाई में जरा सी भी देरी होती है, तो इसका सीधा असर फसल के अंकुरण और अंततः पैदावार पर पड़ता है। किसानों को डर है कि अगर जल्द ही पोर्टल की तकनीकी खामी सुधारकर खाद का वितरण शुरू नहीं किया गया, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

आक्रोशित किसानों ने उठाई कार्रवाई की मांग —

क्षेत्र के किसानों में कृषि विभाग के गैर-जिम्मेदाराना रवैये को लेकर भारी आक्रोश है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन और उप संचालक (कृषि) ने तुरंत संज्ञान लेकर देदला सहकारी समिति के गोदाम से ऑफलाइन या पोर्टल को सुधारकर खाद का वितरण सुनिश्चित नहीं कराया, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने पर मजबूर होंगे।
मुख्य बिंदु जिन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है:
  • भौतिक स्टॉक का मिलान: गोदामों में रखे खाद को तुरंत ऑनलाइन पोर्टल पर लाइव (अपडेट) किया जाए।
  • ऑफलाइन विकल्प: तकनीकी खराबी की स्थिति में पावती या मैन्युअल टोकन के आधार पर खाद देने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
  • जवाबदेही तय हो: गोदाम में खाद होने के बाद भी पोर्टल पर स्टॉक न चढ़ाने वाले लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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