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Home » मध्यप्रदेश » परिषद के ठेका नीलामी में पारदर्शिता को लेकर उठ रहे कई सवाल ??

परिषद में नाका नीलामी पर उठे सवाल, 24.21 लाख में ठेका, आमजन और पत्रकारों को नहीं मिली एंट्र।

मांडव। नगर परिषद मांडव में वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए नाका प्रवेश शुल्क की नीलामी संपन्न हुई। इस नीलामी में तीन ठेकेदारों द्वारा बोली लगाई गई, जिसके बाद नगर परिषद ने 24 लाख 21 हजार रुपये में नाका प्रवेश शुल्क का ठेका अंतिम रूप दिया।

नीलामी प्रक्रिया के दौरान नगर परिषद द्वारा सुरक्षा के लिहाज से पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस निगरानी में पूरी बोली प्रक्रिया सम्पन्न कराई गई। हालांकि इस दौरान नगर के आम नागरिकों और पत्रकारों को नीलामी स्थल पर आने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि इस महत्वपूर्ण नीलामी प्रक्रिया में नगर का कोई भी जनप्रतिनिधि मौजूद नहीं था और न ही किसी पत्रकार की उपस्थिति रही। ऐसे में स्थानीय स्तर पर इस नीलामी को लेकर राजनीतिक षड्यंत्र होने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं।

नगर परिषद द्वारा रखी गई शर्तों के अनुसार नाका टोल पर फास्टैग सिस्टम लगाया जाएगा और उसी के माध्यम से प्रवेश शुल्क लिया जाएगा। लेकिन स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब यह मार्ग धरमपुरी–धार रोड से जुड़ा हुआ है और यहां से गुजरने वाले कई लोग केवल अपने निजी कार्य से धार या धरमपुरी की ओर आते जाते हैं, तो उनसे किस आधार पर प्रवेश शुल्क लिया जाएगा।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस व्यवस्था से उन लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा जो नगर में घूमने या रुकने नहीं आते, बल्कि केवल इस मार्ग से होकर अपने गंतव्य की ओर जाते हैं।

अब देखना यह होगा कि नगर परिषद इस मामले में प्रवेश शुल्क की स्पष्ट व्यवस्था और नियमों को लेकर क्या स्पष्टीकरण देती है, ताकि आम लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

हालांकि अनुभवी और विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नगर में प्रवेश हेतु नाका शुल्क या नगर में प्रवेश के लिए टैक्स वसूलना गैरकानूनी होता है।

आपको बता दें कि यह अंग्रेज शासनकाल में लागू की गई एक व्यवस्था थी, जिसके आधार पर नगर में प्रवेश करने वालों से टैक्स कर वसूल किया जाता था।

संपूर्ण मध्य प्रदेश में मांडव पर्यटन नगरी को छोड़कर कहीं भी किसी स्थान पर कोई टैक्स या कर वसूल नहीं किया जाता है, फिर सिर्फ मांडव में ही इस प्रकार की व्यवस्था क्यों लागू की जाती है, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है ???

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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