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Home » मध्यप्रदेश » तीन राज्यों के संगम के बीच खरडू बड़ी में विराजे भगवान विश्वकर्मा

महाभंडारे में उमड़ा जनसैलाब, दिल्ली से पधारे राष्ट्रीय अध्यक्ष; गूंजे ‘जय विश्वकर्मा’ के जयकारे

कुक्षी/धार। (लक्की जाजू) सृष्टि के रचयिता भगवान श्री विश्वकर्मा की प्राण-प्रतिष्ठा का चार दिवसीय महामहोत्सव शुक्रवार को धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। झाबुआ जिले के ग्राम खरडू बड़ी में आयोजित इस भव्य समारोह में मध्यप्रदेश, गुजरात और राजस्थान के हजारों श्रद्धालुओं ने शिरकत की। शिखर पर ध्वजारोहण और महाआरती के बाद विशाल महाभंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें देर शाम तक हजारों भक्तों ने प्रसादी ग्रहण की।

हवन की पूर्णाहुति और मूर्ति स्थापना

आयोजन के अंतिम दिन महारुद्र नवकुंडी यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान श्री विश्वकर्मा की प्रतिमा को मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया गया।

  • शिखर स्थापना: मंदिर के शिखर एवं धर्मदंड की स्थापना वरदीचंद पंचाल द्वारा की गई।

  • ध्वजारोहण: कीर्ति स्तंभ और ध्वजदंड पर ध्वजारोहण मदनलाल पंचाल (कुंदनपुर) द्वारा संपन्न कराया गया।

  • महाआरती: कार्यक्रम की पहली आरती का सौभाग्य प्रवीण पंचाल और वरदीचंद पंचाल को मिला।

मंच पर जुटे समाज के दिग्गज

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली से पधारे अखिल भारतीय विश्वकर्मा विराट संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल पंचाल उपस्थित रहे। कार्यक्रम को पीपलखूँटा धाम हनुमंत आश्रम के महंत दयाराम दास महाराज का दिव्य सान्निध्य प्राप्त हुआ।

मंच पर इनकी रही उपस्थिति: प्रदेश महामंत्री मदनलाल पंचाल, राष्ट्रीय सलाहकार अशोक पॅंवार, समाज अध्यक्ष जगदीश पांचाल (थांदला), सालिग्राम पॅंवार (बाग), पत्रकार रमेश नेता जी, संतोष विश्वकर्मा, लखन विश्वकर्मा सहित दाहोद, मेघनगर, कुंदनपुर और कल्याणपुर के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

साफा पहनाकर किया अतिथियों का सत्कार

पंचाल समाज खरडू बड़ी की स्वागत समिति (आशीष पंचाल, ईश्वरलाल, हीरालाल, राजेंद्र, मनोज व धर्मेंद्र पंचाल) ने तीनों राज्यों से आए अतिथियों का माला और पारंपरिक साफा पहनाकर भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम का सफल संचालन राजेन्द्र कन्हैयालाल पंचाल ने किया।

“यह आयोजन समाज की एकता और श्रद्धा का प्रतीक है। चार दिनों तक चले इस यज्ञ और भक्तिमय माहौल ने पूरे क्षेत्र को धर्ममय कर दिया।” — आयोजन समिति, पंचाल समाज खरडू बड़ी

खास बातें: जो बनीं चर्चा का विषय

  • त्रिवेणी संगम: एमपी, यूपी और राजस्थान के समाजजनों का अनूठा मिलन।

  • भक्ति संध्या: चार दिनों तक भजनों की प्रस्तुतियों पर झूमते रहे श्रद्धालु।

  • अनुशासन: हजारों की भीड़ के बावजूद सुव्यवस्थित ढंग से हुआ महाप्रसादी वितरण।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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