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Home » मध्यप्रदेश » हाई अलर्ट’ पर भोजशाला, पूरा शहर सुरक्षा छावनी में तब्दील

हाईकोर्ट के फैसले के बाद पहले शुक्रवार को भोजशाला में अखंड पूजा।

भक्ति के रंग में डूबी भोजशाला, थिरके कदम और गूंजी हनुमान चालीसा

धार। हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुक्रवार को भोजशाला परिसर के भीतर का नजारा पूरी तरह भक्तिमय और उत्सव जैसा नजर आया। बरसों बाद शुक्रवार के दिन मां वाग्देवी के दर्शन और अखंड पूजा का अवसर मिलने से श्रद्धालुओं का उत्साह सातवें आसमान पर था। इंदौर हाईकोर्ट के हालिया आदेश के बाद आज का शुक्रवार इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है। साल 2003 से चली आ रही दशकों पुरानी व्यवस्था के टूटने के बाद, यह पहला मौका है जब शुक्रवार को भोजशाला परिसर में नमाज नहीं हुई, बल्कि सुबह से ही मां वाग्देवी की आराधना और पूजा-अर्चना का दौर जारी है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे धार शहर को ‘सुरक्षा छावनी’ में तब्दील कर दिया गया है। चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात है और आसमान से लेकर जमीन तक पैनी नजर रखी जा रही है।

2200 जवानों का पहरा, छावनी बना भोजशाला परिसर

हाईकोर्ट के फैसले के बाद शहर में ‘हाई अलर्ट’ जैसी स्थिति है। कानून व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए प्रशासन ने अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए हैं।

  • मल्टी-लेयर सुरक्षा: धार एसपी सचिन शर्मा के नेतृत्व में 1800 से 2200 पुलिस जवानों को तैनात किया गया है।
  • विशेष टीमें सक्रिय: सुरक्षा बेड़े में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF), सीआरपीएफ (CRPF), एसएफ की कंपनियां, टियर गैस स्क्वाड और डॉग स्क्वाड शामिल हैं।
  • चप्पे-चप्पे पर नजर: ड्रोन कैमरों से संवेदनशील इलाकों की निगरानी की जा रही है। अकेले भोजशाला परिसर और उसके आसपास 700 जवान तैनात हैं।
  • घुड़सवार दस्ता: खुद एसपी सचिन शर्मा घुड़सवार दस्ते के साथ सड़कों पर मार्च करते और हालात का जायजा लेते नजर आए।

धार एसपी सचिन शर्मा ने कहा: “माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का अक्षरशः पालन कराया जाएगा। मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर और ASI द्वारा अधिकृत अनुमतियों के आधार पर ही प्रवेश दिया जा रहा है। हमने सभी समुदायों और धर्मगुरुओं से बात की है। शहर में शांति और भाईचारा कायम रखना हमारी प्राथमिकता है।”

परिसर में थिरकीं महिलाएं, गूंजे ‘जय श्री राम’ के नारे

भोजशाला के भीतर आज का नजारा बिल्कुल बदला हुआ था। शुक्रवार को पूरे दिन पूजा-अर्चना की अनुमति मिलने से हिंदू श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। आंदोलन के दौरान शहीद हुए कारसेवकों के परिजनों ने भी मां सरस्वती के दर्शन किए। परिसर के अंदर महिलाएं भक्ति गीतों पर झूमती-नाचती नजर आईं, तो वहीं श्रद्धालुओं ने हनुमान चालीसा का पाठ किया। ‘जय श्री राम’ और ‘मां वाग्देवी’ के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

श्रद्धालुओं का कहना था, “यह हमारे लिए गर्व का दिन है। बहुत लंबे संघर्ष के बाद हमें शुक्रवार को अखंड पूजा और आरती का यह अवसर मिला है।”

कारसेवकों के परिजनों ने टेका मत्था इस ऐतिहासिक दिन पर भोजशाला आंदोलन के दौरान शहीद हुए कारसेवकों के परिजन भी परिसर पहुंचे। मां सरस्वती की चौखट पर जब उन्होंने दर्शन और पूजन किया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें खुशी और गौरव से नम हो गईं।

ASI की ‘लापरवाही’ से संशय बरकरार, सूचना बोर्ड खाली!

इस बेहद संवेदनशील माहौल के बीच केंद्रीय पुरातत्व विभाग (ASI) की एक बड़ी ढिलाई भी सामने आई है। अदालत के आदेश को हफ्ता बीत जाने के बाद भी नई गाइडलाइंस और व्यवस्था की जानकारी आम जनता तक नहीं पहुंच सकी है।

भोजशाला परिसर में लगे पुराने सूचना बोर्ड से पुराने निर्देश तो हटा दिए गए हैं, लेकिन नए नियमों का कोई आधिकारिक बोर्ड अब तक नहीं लगाया गया है। इस वजह से स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं में नई व्यवस्था को लेकर अब भी कई भ्रांतियां और उत्सुकता बनी हुई है।

अफवाह फैलाने वालों पर ‘डिजिटल स्ट्राइक’

प्रशासनिक अमला जमीन के साथ-साथ डिजिटल दुनिया पर भी पैनी नजर रखे हुए है। साइबर सेल और खुफिया एजेंसियां सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म को स्कैन कर रही हैं। अधिकारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि किसी भी भ्रामक या भड़काऊ पोस्ट पर तत्काल एक्शन लिया जाएगा। कुछ संवेदनशील मामलों में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारियां भी की हैं।

मुस्लिम पक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, आज अन्य मस्जिदों में पढ़ी नमाज

वर्ष 2003 की व्यवस्था के तहत धार की भोजशाला में मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति थी। लेकिन हाईकोर्ट के नए आदेश के बाद जुम्मे की नमाज बंद होने से मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मुस्लिम पक्ष के अब्दुल समद और शहर काजी वकार सादिक के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (SLP) दायर कर दी गई है, जिस पर सुनवाई होना बाकी है। हालांकि, आज जुम्मे के मौके पर मुस्लिम समाज ने पहले ही स्थिति साफ कर दी थी और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भोजशाला के बजाय अपने नजदीकी मस्जिदों में नमाज अदा की।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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