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Home » मध्यप्रदेश » शिक्षा को बनाया व्यवसाय, निजी स्कूलों की मनमानी

धार। मध्य प्रदेश सरकार एवं भारत सरकार सर्व शिक्षा अभियान जैसे अभियान चला कर सब पड़े सब लिखे जैसे बड़े-बड़े नारे लाखों करोड़ों का खर्च कर दीवारों पर लिखा जा रहे हैं, वहीं इसके लिए एक अलग विभाग भी बनाया गया है। बावजूद इसके निजी स्कूलों की मनमानी के चलते प्रशासन उनके सामने नतमस्ता क्यो हो जाता है।

निजी स्कूलों के मनमानी का सिलसिला चरम पर है।

कुछ समय पूर्व ही एक निजी स्कूल के द्वारा एक बच्चे को स्कूल से निकाल दिए जाने एवं TC नहीं दिए जाने के कारण उस बच्चे ने जहर खा लिया था जिसका उपचार धार के निजी चिकित्सालय में हुआ उसके बाद शिक्षा विभाग के अफसर एवं स्कूल संचालक से तंग आकर उस बच्चे के पिता ने भी जहर खा लिया था। मामला धार जिला मुख्यालय से मात्र 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल का है।

स्कूल संचालक की मनमानी के बाद बच्चे और उसके पिता की जान पर बन आई थी। उसके बाद स्कूल प्रशासन ने अधिकारियों के साथ सांठ गांठ कर बच्चे को TC वगैरा दे दी और मामले को रफा दफा कर दिया था। ऐसे ही कहीं मामले और भी जारी है, जिसमें स्कूल संचालक द्वारा बच्चों के TC नहीं दी जाती है। कई पेरेंट्स बच्चों की ट्रांसफर सर्टिफिकेट के लिए स्कूलों के चक्कर लगाते नजर आते हैं।

सबसे बड़ा लोचा स्कूल भवन का

जिले में सैकड़ो की तादाद में निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं निजी स्कूल संचालक शासन के आदेश एवं नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। नियमानुसार स्कूल भवन बिल्डिंग स्वयं स्कूल संचालक की होना चाहिए साथ ही बच्चों के खेलकूद के लिए एक हेक्टेयर का मैदान होना चाहिए, स्कूल सर्व सुविधा युक्त होना चाहिए, इसके विपरीत कई स्कूल संचालक किराए की बिल्डिंग में अपना स्कूल चला रहे हैं और बच्चों से मन माने ढंग से फीस के नाम पर वसूली कर रहे हैं इसका कोई मापदंड नहीं है।

स्कूल संचालक से संबंधित और भी कई खुलासे मध्य भारत लाइव न्यूज़ करेगा। यह खबर पार्ट वन है अभी कई पार्ट प्रसारित होंगे।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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